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ट्राॅमा सेंटर स्टाफ को आठ महीने से वेतन नहीं

7 वर्ष पहले
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कर्ज लेकर घर खर्च चलाने को मजबूर है स्टाफ

भास्कर न्यूज | जालंधर

सिविलअस्पतालके ट्राॅमा सेंटर के डॉक्टरों और वार्ड स्टाफ को अाठ महीने बीतने के बाद भी वेतन नहीं मिला है। इनमें शहर के 10 और पठानकोट ट्राॅमा सेंटर के नौ वार्ड अटेंडेंट हैं। ये लोग कर्ज उठाकर घर का गुजारा कर रहे हैं। यहां के सेंटर में 2009 में 12 डॉ़क्टरों को तैनात किया गया था, लेकिन वेतन मिलने के कारण 8 छोड़कर जा चुके हैं। अभी डॉ. अमित मित्तल, डॉ. अभिषेक सच्चर, डॉ. मनदीप सिंह और डॉ. तनवीर सिंह ही ट्राॅमा सेंटर में काम कर रहे हैं। उनका पांच साल का कांट्रेक्ट भी इसी महीने खत्म हो रहा है। वे सरकार से रेगुलर किए जाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें अगर रेगुलर कर वेतन दिया जाता है तो उन्हें फ्रैशर डॉक्टर जितना वेतन मिलेगा।

नए नियमों के कारण हम पेंशन नहीं मांग रहे, लेकिन कम से कम हमें पांच साल की सिनियोरिटी तो दो। हम भी गरीब लोगों को क्वालिटी हेल्थ सर्विसेज देना चाहते हैं। हमारा काम प्राइवेट अस्पतालों से कम नहीं है। हर डाक्टर युवा है और देश की सेवा करना चाहता है। सरकार ही हमें ऐसा करने से रोक रही है। लंबे वक्त से सैलरी मिलने से घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है। कर्ज उठा कर घर की रोटी चल रही है। घर जाते हैं तो बच्चे मुंह की तरफ देखते हैं कि पापा कुछ लाए होंगे। दुनिया तो यही समझती है कि डाक्टर मोटी सैलरी उठाते हैं। कोई हमारे बारे में नहीं सोचता।

दूसरी ओर सूत्रों के मुताबिक वार्ड अटेंडेंट्स और नर्सों को डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेस में मर्ज कर लिया गया है। नर्सों की सैलरी वक्त पर ही रही है। वार्ड अटेंडेंट्स सिविल अस्पताल में कंप्यूटर आॅपरेटर का काम भी कर रहे हैं। सात नवंबर को सेहत मंत्री सुरजीत कुमार ज्याणी, प्रिंसिपल हेल्थ सेक्रेटरी विन्नी महाजन और पीएचएससी के एमडी हुस्न लाल ने बताया था कि सैलरी कुछ ही दिनों में दे दी जाएगी। शनिवार को किसी के पास जवाब नहीं था। सेक्रेटरी ने कहा देखते हैं जल्दी जारी करेंगे। मंत्री ने छुट्टी की बात कही। बोले - सोमवार को बता सकते हैं।

19 दिसंबर को बर्न वार्ड की इंस्पेक्शन के लिए केंद्र से एक टीम रही है जो बठिंडा, पटियाला और जालंधर के अस्पतालों का दौरा करेगी। एमएस डॉ. कैलाश कपूर ने बताया कि केंद्रीय सेहत मंत्रालय की टीम सर्वे करने के बाद यहां अलग से बर्न यूनिट