- Hindi News
- ‘हिंदी साहित्य को इंटरनेशनल लैंग्वेज में पहुंचा रहा अनुवाद’
‘हिंदी साहित्य को इंटरनेशनल लैंग्वेज में पहुंचा रहा अनुवाद’
केएमवीमेंवैश्वीकरण, मीडिया और हिंदी विषय पर सेमिनार के दूसरे दिन अनुवाद का महत्व बताया गया। इसमें देश में प्रचार-प्रसार में अनुवाद कैसे इनडायरेक्टली काम करता है, पर भी चर्चा हुई। इसकी कमियाें और चुनौतियां भी निकाली गईं।
यूजीसी की ओर से करवाए गए इस इंटरनेशनल सेमिनार की अध्यक्षता भारतीय अनुवाद परिषद, दिल्ली के निदेशक डॉ. पूरनचंद ने की। अनुवाद के क्षेत्र में सालों से काम कर रहे विद्वान वक्ताओं में हरीश सेठी और डॉ. राकेश शर्मा ने अपने वक्तव्यों में अनुवाद के जन्म, उपयोगिता, वैश्वीकरण के युग में अनुवाद की भूमिका, अनुवादक के गुण तथा पारिभाषिक एवं तकनीकी शब्दावली के निर्माण के इतिहास पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी के समापन सत्र में शिरोमणि साहित्यकार सुरेश सेठ मुख्यातिथि के रूप में मौजूद रहे।
विद्वान प्रो. डॉ. अवधेश कुमार सिंह (पूर्व कुलपति, डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर मुक्त विश्वविद्यालय, गुजरात) ने समापन व्याख्यान दिया। अपने समापन व्याख्यान में उन्होंने कहा कि भूमंडलीकरण आज के वैश्विक संदर्भ में एक अपरिवर्तनीय स्थिति है और इस सतत गतिमान प्रक्रिया में तकनीक, मीडिया और विश्व स्तर पर चल रहे आर्थिक एकीकरण अपना योगदान है।
सेमिनार के दौरान भाषण देते वक्ता।