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टीचरों को दो महीने ही सैलरी दे पाएंगे कॉलेज
यहहालतसिर्फ जालंधर की ही नहीं पूरे पंजाब की है। चार साल बाद यह दूसरा मौका है जब शहर के कॉलेजों के प्रिंसिपल अपनी मांगों के लिए पंजाब सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे। हालांकि वह अपनी ग्रांट इन ऐड पोस्टों के टीचरों की 18 महीने से रुकी सैलरी को दिलवाने के लिए उतर रहे हैं, लेकिन मसला सिर्फ टीचरों का नहीं है, बल्कि कॉलेजों का भी है।
पंजाब के छोटे कॉलेज पिछले कई महीने से लोन लेकर टीचरों की सैलरी भर रहे थे अब तो बैंकों ने भी लोन देने से इंकार कर दिया। कॉलेजों के प्रिंसिपलों ने नाम बताने की शर्त पर कहा कि बड़े कॉलेज अपनी स्टूडेंट स्ट्रेंथ और फीसों के सिर पर सैलरी दे रहे थे। उन्होंने ट्यूशन फीस से लेकर डेवलपमेंट और हॉस्टल फंड तक खर्च डाला। लेकिन अब बड़े कॉलेजों की भी बस हो गई है। क्योंकि इस कारण फंड की भी शॉर्टेज होने लगी है। बड़े कॉलेजों के पास बस अब दो महीने का फंड बाकी है। यानी कि और दो महीने पंजाब सरकार ने ग्रांट जारी नहीं की तो बड़े कॉलेज भी टीचरों को सैलेरी नहीं दे पाएंगे।
सरकार पर दबाव बनाने के लिए पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी और जीएनडीयू ने हाथ मिला लिए हैं और ज्वाइंट एक्शन कमेटी सड़कों पर उतरेगी, जिसमें नॉन टीचिंग और टीचिंग बड़ी स्ट्रेंथ होगी। मालूम हो कि चार साल पहले भी पंजाब सरकार ने 2006 के रिवाइज्ड ग्रेड के हिसाब से सैलेरी दे रहे थे, ही एरियर। लंबा समय तक जब इंप्लीमेंटेशन नहीं हुई तो सभी कॉलेजों ने इसी तरह से ज्वाइंट कमेटी बनाकर विरोध किया था, तब तो मसला हल हो गया था।
खालसा कॉलेज का 18 करोड़ बकाया : प्रिं. समरा
एसोसिएशनके फाइनेंस सैक्रेटरी और खालसा कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. गुरपिंद्र सिंह समरा ने कहा कि उनके कॉलेज की एक महीने की सैलरी लगभग एक करोड़ रुपए है। ऐसे में पिछले 18 महीने का हम पर 18 करोड़ रुपए बकाया बनता है। हर कॉलेज का महीने का सैलरी पर खर्च 14-15 करोड़ रुपए है। देखिए हम पिछले 18 महीने से हर महीने करोड़ों रुपए का खर्च अपने दम पर सह रहे हैं, लेकिन अब बस हो गई है। अब तो होस्टल फंड और डेवलेपमेंट फंड की जमा रकम भी खत्म हो गई। सड़कों पर नहीं उतरेंगे तो क्या करेंगे।
दो महीने में कॉलेजों को लग जाएंगे ताले : डॉ. सरिता
एडिडकॉलेज प्रिंसिपल एसोसिएशन की जनरल सैक्रेटरी और बीडीआर्य कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. सरिता वर्मा ने इ