अब कैंसर थैरेपी में भी काम रहा गणित
कुछलोगोंके लिए मैथ्स बहुत ही मुश्किल सब्जेक्ट है तो कुछ लोगों के लिए बहुत ही बोरिंग। लेकिन अब मैथ्स का एरिया इतना बड़ा हो चुका है कि इंडस्ट्री से लेकर कॉमर्स क्षेत्र तक, बायोलॉजी से लेकर इकॉनॉमिक्स अौर यहां तक कि फिलॉस्फी में भी मैथ्स का इस्तेमाल हो रहा है। किसी गैजेट का वारंटी पीरियड निकालना हो या फिर किसी मशीन का, अब हम मैथ्स के इस्तेमाल से ये सब निकाल सकते हैं। नई दिल्ली की यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली साउथ कैंपस की डॉ. सीएस ललिता ने कहा कि मैथ्स का इस्तेमाल अब नैनोटेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी और बायो मैथेमेटिक्स में भी होने लगा है। यहां तक कि कैंसर थैरेपी, एक्स-रे आदि में भी मैथ्स यूज होता है। कैंसर थैरेपी में हम रेडिएशन कैलकुलेट करने के लिए, कैंसर का साइज कितना बड़ा है - ये जानने के लिए मैथ्स का इस्तेमाल करते हैं।
डीएवी कालेज में चल रहे इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन मॉडलिंग सिमुलेशन एंड ओप्टिमाइजिंग टेक्निकस आईसीएसएमओटी 2015 के पहले दिन वक्ताओं ने यह बात कही। रोहतक की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के डॉ. गुलशन तनेजा ने बताया कि उन्होंने कहा- रिलाइबिलिटी मॉडल विद कंडीशनल वारंटी एंड डिसप्यूट बनाया। इससे हम मशीन कितने दिन चलेगी पता कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक बार मेरा मोबाइल पानी में गिरने से खराब हो गया। जब मैं इसे रिप्लेस कराने दुकान पर गया तो सिस्टम प्रोवाइडर ने कहा कि ये वारंटी कंडीशन के अंडर नहीं आता। इसको अगर रिपेयर करवाना है तो आपको पैसे देने पड़ेंगे। उसके बाद मैंने सोचा कि सिस्टम का वारंटी पीरियड कैसे डिसाइड होता है। मैंने रिलाइबिलिटी मॉडल के जरिए कंपनी के सिस्टम का डाटा इकट्ठा किया। उनकी प्रोबेबिलिटी निकाली कि सिस्टम की टेंडेंसी कितने समय में फेल होने की है। कितने समय में रिपेयर होगा। पीजी डिपार्टमेंट ऑफ मैथ्स की ओर से करवाई इस कांफ्रेंस में चीफगेस्ट डीएवी के ऑनरेरी ट्रेजरर महेश चोपड़ा थे। उन्होंने कहा कि मैथेमेटिक्स हर फील्ड में काम आती है। चाहे वो कॉमर्स हो या अकाउंट्स। हमें अपनी डेली रूटीन में मैथ्स के महत्त्व को नजरअंदाज नहीं कर सकते। कांफ्रेंस में नेशनल बोर्ड ऑफ हायर मैथेमेटिक्स, डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी, डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन, मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस और यूजीसी ने सहयोग किया।
शाम को कल्चरल प्रोग्राम हुआ जिसमें डीएवी मैनेजमेंट कमेटी के सलाहकार एचआर गंधार चीफगेस्ट थे।
पहले दिन 6 टेक्निकल सेशन, पेपर प्रेजेंट किए
विभिन्नसेशनों में डॉ. आरती सक्सेना, आर. मणिकंदन, जतिंदर पाल सिंह, भारती गुप्ता, भकटिंडा त्रिवेदी, टीना वर्मा, डॉ. नवीन गुलाटी, सुरेखा, जीवन जोत कौर, प्रियंका यादव, परमपाल सिंह, डॉ. शशिबाला, डॉ. हीरेन दोषी, पवन कुमार, मनीषा शर्मा, मितेष शाह, अरविंद कुमार, बलबीर सिंह, डॉ. उपासना शर्मा, डॉ. अनिता तनेजा, चारू बाला, मोहन कुमार, डॉ. एमएन पटेल, डॉ. चिराग त्रिवेदी, पंकज कालड़ा, डॉ. राजेश डंगवाल, विभा सहिजपाल, सुखप्रीत कौर, हरविंदर कौर, रितु मल्होत्रा, राजीव कुमार सक्सेना, तरुण जैन, नीरज डोडा, निरंजन हरि, डॉ. पराग बी शाह, डॉ. जयेश शाह, परिंदर सिंह, करूणा रघुवंशी आदि ने पेपर प्रेजेंट किए। यहां प्रिंसिपल डॉ. बीबी शर्मा, प्रोग्राम इंचार्ज डॉ. समीर शर्मा, ऑर्गेनाइजर प्रो. अजय अग्रवाल, प्रो. एसके तुली, प्रो. सीमा शर्मा, डॉ. पीके शर्मा, प्रो. अंजु, प्रो. मनीष अरोड़ा, प्रो. आशु, प्रो. राजेश पराशर, बांग्लादेश की युनिवर्सिटी के करणदेव, पीयू चंडीगढ़ की डॉ. मनीषा तिवाड़ी, यमुना इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के डॉ. टीपी सिंह थे।
फेलियर रेट से पता चल जाता है मशीन फिर कब बिगड़ेगी
ओमानकी कैलेडोनियम युनिवर्सिटी कालेज ऑफ इंजीनियरिंग, मस्कट के डॉ. एसएम रिजवान ने बताया कि दुर्गापुर में उन्होंने स्टील इंडस्ट्री का चार साल का डाटा कलेक्ट किया। मशीन खराब होने का एवरेज समय निकाला। अब हम फेलियर रेट निकाल कर बता सकते हंै कि ये मशीन कितने समय बाद खराब होगी। मिडल ईस्ट डीसेलाईजेशन रिसर्च सेंटर, ओमान में उन्होंने रिलाइबिलिटी एनॉलसिस ऑफ डिसेलाइजेशन प्लांट केे लिए भी काम किया।
इंटरनेशनल सेमिनार में सोविनियर िरलीज करते डीएवी के ऑनरेरी ट्रेजरर महेश चोपड़ा, प्रिंसिपल बीबी शर्मा अन्य। -भास्कर