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‘परमात्मा दिखावे से नहीं श्रद्धा से प्रसन्न होते हैं’
जालंधर | परमात्मादिखावे अर्थात चढ़ावे से नहीं मन के भाव श्रद्धा से प्रसन्न होते हैं। इसलिए सदैव सच्चे मन से परमात्मा का ध्यान करें। इससे सभी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होंगी। ये बातें कथा व्यास साध्वी महंत प्रियंका ने कथा दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि आज मनुष्य बंधनों में इतना बंध चुका है कि उसे परमात्मा का नाम लेने तक का समय नहीं मिल रहा। जबकि आज वह जो कुछ भी है परमात्मा की कृपा से ही है। धार्मिक आयोजन में बैठे हुए भी मनुष्य का ध्यान कारोबार या परिवार की तरफ ही रहता है। मगर इस सत्य से कभी भी नजर नहीं फेरनी चाहिए कि परमात्मा के नाम के बिना उसका कोई भी वजूद नहीं है।
इस अवसर पर चंद्रकांत, नरिंदर शर्मा, पवन मल्होत्रा, नरेश, पार्षद वेद विशिष्ट, पार्षद अर्जुन सिंह पप्पी, पार्षद भगवंत प्रभाकर, जगदीश अरोड़ा, कमल जैन भी थे।