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संतुलन का नाम है संगीत : डॉ. कालिया

6 वर्ष पहले
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एचएमवी में क्लासिकल म्यूजिक पर नेशनल सेमिनार

सिटीरिपोर्टर | जालंधर

एचएमवीमेंक्लासिकल म्यूजिक पर नेशनल सेमिनार का आगाज प्रिंसिपल डॉ. रेखा कालिया भारद्वाज ने इस बात से किया कि संगीत वास्तव में संतुलन का नाम है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, वीणा की तारों को ज्यादा कसने या ढीला छोड़ने से जैसे संगीत की धुन मधुर नहीं निकलती। धुन मधुर हो इसलिए तारों को संतुलित रखना पड़ता है, जीवन भी ऐसे ही चलता है।

सेमिनार का विषय था ‘भारतीय क्लासिकल संगीत में परम्परा रचनात्मकता और नवीनता’। सेमिनार आकाशवाणी जालंधर और उमक सेंटर फॉर कल्चर नई दिल्ली के सहयोग से करवाया गया। सेमिनार के मुख्यातिथि रहे संत बाबा भाग सिंह इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर और आरईसी जालंधर के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. एचएस सागर। सेमिनार में सेशन का आगाज दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और सितार वादक डॉ. अनुपम महाजन ने किया। गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर की डीन म्यूजि़क फैकल्टी डॉ. गुरप्रीत कौर ने कहा बदलाव जीवन का अहम हिस्सा है, इसलिए संगीत के क्षेत्र में परम्परा, रचनात्मकता और नवीनता साथ-साथ सफर करते हैं। सेमिनार में बतौर की-नोट स्पीकर पहुंचे सितार वादक पद्म भूषण पंडित देबू चौधरी ने कहा कि संगीत साधना है इसलिए यह कभी नहीं सेाचना चाहिए कि मैं सब कुछ सीख गया। आकाशवाणी जालंधर के डायरेक्टर प्रोग्रामिंग तहसीम अब्बासी ने कहा कि वैज्ञानिक दौर में हमें अपना संगीत और विरासत नहीं भुलाना चाहिए। सेमिनार में हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन के डायरेक्टर एसएस अजिमल, सिया बिहारी सरन, पंडित मनु सीन, पत्रकार इरविन खन्ना, पंडित काले राम जी, उमक सेंटर फॉर कल्चर के जालंधर चैप्टर से सतनाम माणक और दीपक बाली, कन्वीनर डॉ. ज्योति मित्तू सेमिनार का हिस्सा रहे।

एचएमवी में सेमिनार के दौरान उपस्थित प्रिंसिपल डॉ. रेखा कालिया भारद्वाज, व्यास कल्याण सिंह, डॉ. संतोष खन्ना, ज्योति मित्तू अन्य। अनुपम महाजन ने सितार वादन किया।