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प्रताप बाग : जहां पहले लगती थी सब्जी मंडी, अब खिले हैं फूल

6 वर्ष पहले
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प्रताप बाग में लगे झूलों में मौज-मस्ती करते हुए बच्चे।

सिटी रिपोर्टर | जालंधर

सब्जीमंडी की आवाजें। कचरे की बदबू। ट्रैफिक की चैं-पैं। धार्मिक आयोजनों में बजने वाले स्पीकर। सारा साल कोई कोई प्रोग्राम और एक दिन दशहरा भी होता था। 10 साल पहले 2005 में प्रताप बाग के पार्क का यही हाल था। अब इस पार्क में फूल खिले हैं। हरियाली है। लोग सुबह शाम सैर करते हैं। दूर दूर के इलाकों से बच्चे आकर खेलते हैं। ऐसा सिर्फ इसलिए संभव हुआ, क्योंकि वहां के लोगों ने इस मैदान को पार्क में बदलने का फैसला ले लिया था। इनमें एक नाम वरिंदर मलिक का भी है।

कुछ साल पहले इसी पार्क के सामने रहने वाले इंडस्ट्रियलिस्ट वरिंदर मलिक किस्सा सुनाते हैं कि मंडी की आवाजें और प्रदूषण ने उनको दिल का मरीज बना दिया। 46 साल की उम्र में उनकी बाइपास सर्जरी तक हो गई। डॉक्टर्स ने उन्हें सैर करने के लिए सलाह दी थी, लेकिन सैर कहां करते। सामने प्रताप बाग में तो गंदगी थी। कचरे के ढेर थे और मंडी लगती थी। वह सैर करने के लिए कैंट के जवाहर पार्क में जाते रहे। फिर उन्होंने ठानी की जैसे उनके साथ हुआ, वह किसी और के साथ नहीं होने देंगे। इसी पार्क को सैर करने के लायक बनाएंगे। उन्होंने इलाके के एक व्यक्ति तरसेम लाल थापर को साथ लिया। दोनों ने और साथियों राकेश कोहली, दर्शन लाल कश्यप, महाराज खन्ना और वीके टंडन के साथ मिलकर पार्क में पहले कचरा साफ कराया। फिर लंबा संघर्ष कर मंडी बंद करवाई। अपनी जेब से पैसे खर्च किए।

नगर निगम के उस समय के कमिश्नर रहे सतवंत सिंह जौहल ने उनकी मदद की। उन्होंने पार्क से मंडी के बाद बाकी आयोजन करवाने पर रोक लगवाई। कुछ राजनीतिक पार्टियों ने जबरन वहां दशहरा मनाया। उन्होंने अपने वालंटियर खड़े कर पार्क में लगे पौधों को बमुश्किल बचाया। फिर लोग जुड़ते गए। कमेटी बनी। माली रखा। धीरे-धीरे पार्क की संदुरता निखरती गई। वरिंदर मलिक अब पार्क की देखभाल कर रही कमेटी से किनारा कर गए हैं। उनका कहना है कि पार्क के सेंटर में 110 फुट का राष्ट्रीय ध्वज लगाना गलत फैसला है। इससे पार्क का मुख्य थीम खत्म होता है। इसे टंकी के साथ लगाया जाता तो वहां केवल कूड़ा फेंकने की समस्या खत्म होती, बल्कि खुली जगह में ध्वज लग पाता।

अब कमेटी को देख रहे उप प्रधान योगेश कोहली बताते हैं कि पार्क की काया बदलने लगी है। पार्क में विकास हो रहा है। ध्वज पार्क में लाना उनकी उपलब्धि है। कुछ ने विरोध किया तो ज्यादातर खुश हैं। अब इलाके के सीपीएस केडी भंडारी ने इस पार्क के लिए 25 लाख रुपए की ग्रांट दी है। इस ग्रांट से पार्क में म्यूजिक सिस्टम लगेगा। कैमरे लगाए जाएंगे और लाइब्रेरी भी बनेगी।

पेज2 पर पढ़ें

>हमने इस पार्क के िलए पसीना बहाया।

> अर्बन इस्टेट पार्क महिलाओं ने संभाला।

> घर के सामने पार्क में लगे पौधो को संभालेंगे रेजिडेंट्स।