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अपडेट रहने को रोज चार घंटे पढ़ें : डॉ. चितकारा

6 वर्ष पहले
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शरीर में पानी की कमी बढ़ाती है संक्रामक रोग : आईएपी

पांचसालके बच्चों में दस्त रोग और निमोनिया जैसे घातक संक्रामक रोगों से हम लड़ रहे हैं। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने 2015 तक पांच साल तक के बच्चों की मौत की दर को टू थर्ड करने का लक्ष्य रखा था। हम उसके काफी करीब पहुंच चुके हैं। यह दावा इंडियन एसोसिएशन ऑफ पैडेट्रिशियन (आईएपी) के नेशनल चैप्टर के चेयरमैन डॉ. जेएस चितकारा ने आईएपी की मीटिंग में किया।

उन्होंने बताया कि 1990 में एक हजार बच्चों के पीछे संक्रामक रोगों से 126 बच्चे मर रहे थे, जो अभी 46 रह गए हैं। इस मौत दर को वेक्सीनेशन से ही कम किया जा सकता है। इसलिए पब्लिक सेक्टर के साथ मिलकर हम चल रहे हैं। लेकिन इसके लिए उन्हें अपडेट रहना होगा। 365 दिन में हर रोज चार घंटे पढ़कर ही डॉक्टर्स अपडेट रह सकते हैं। हम बच्चे के डॉक्टर्स को पढ़ने की आदत डालने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके लिए मेडिकल जनरल पढ़ने होंगे। उन जनरल की हाई लेवल नॉलेज को समझना होगा।

वह कहते हैं कि पब्लिक हेल्थ में प्राइवेट चाइल्ड स्पेशलिस्टों का अहम रोल है। उनकी भागीदारी बिना किसी बीमारी से लड़ना पब्लिक सेक्टर का अकेले का काम नहीं है। ग्रामीण इलाकों में प्राइवेट डॉक्टर्स मात्र 10 फीसदी है। और शहरी इलाकों में शहरों के प्राइवेट सेक्टर की रेशो 30-70 और 40-60 तक भी है।

फ्रीहो रही है वैक्सीन, पड़ेगा फर्क | जैसे-जैसेसरकारें जरूरी टीकाकरण को फ्री कर रही हैं, वैसे-वैसे हाई रिस्क बच्चों की वैक्सीनेशन की कमी के चलते मौत की दर कम हुई है। डॉ. चितकारा मानते हैं कि जो वैक्सीन बनी है, वह सभी बच्चों को लगनी ही चाहिए। सरकार ने धीरे-धीरे हीब और हेपैटाइटिस जैसी बीमारियों के लिए भी वैक्सीनेशन फ्री कर दी है। पेंटावेलेंट टीका फ्री किया है। अब रोटा वायरस की प्रोडक्शन भारत में होनी शुरू हो रही है। सरकार इसे भी जल्द फ्री करने की ओर अग्रसर है। रोटा वैक्सीन भी जल्द ही मुफ्त में बच्चों को लगनी शुरू होगी। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है। निमोकोक्ल वैक्सीन अभी महंगी है, इसकी प्रोडक्शन जब भारत में शुरू होगी, तभी यह सभी लोगों की पहुंच में हो सकेगी।

आईएपी की पंजाब चैप्टर की वर्कशॉप में उपस्थित डॉ. अनिल सूद, शाम कुकरेजा, डॉ. रजिन्दर, जेएस चीतकारा, डॉ. पूजा कपूर, डॉ. लालित टंडन, डॉ. हबीब।