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नवरात्र कल से, कलश स्थापना का मुहूर्त 5.57

7 वर्ष पहले
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नवरात्रपूजन,जो इस बार 25 सितंबर से तीन अक्टूबर तक चलेंगे, हस्त नक्षत्र के कारण विशेष फलदायी होगा। इस बार नवरात्र में किसी भी तिथि को लोपन नहीं होगा। बुधवार को स्नान दान की अमावस्या रहेगी और विजय दशमी तीन अक्टूबर होगी। पं. गरुड़ प्रसाद शुक्ला के अनुसार चंद्र के नक्षत्र हस्त से शारदीय नवरात्र की शुरूआत हो रही है, जो इसे विशेष फलदायी बना रही है। चूंकि वर्तमान संवत्सर 2071 प्लवंग है और उसका राजा मंत्री दोनों ही चंद्र है। ऐसे में चंद्र के नक्षत्र का हस्त योग फलदायी रहेगा। नवरात्र का पहला दिन गुरुवार विष्णु को समर्पित है। कन्या राशि में सूर्य और चंद्र दोनों का वास है। ऐसे में नारायण, भगवती ही नहीं शिव-पार्वती की कृपा बनेगी। 25 सितंबर को कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह 5.57 बजे है। उनके अनुसार मुख्य लग्न सिंह है जो सुबह 5.25 से 7.39 तक रहेगा। इस स्थिर लग्न के बाद कन्या लग्न 7.39 से 9.57 तक रहेगा। दशमी तीन अक्टूबर को सुबह 9.58 मिनट से शुरू हो जाएगा और चार अक्टूबर को सुबह 6.19 तक रहेगी। इसलिए रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों का दहन तीन अक्टूबर की शाम को ही किया जाएगा।

25 सितंबर को शेलपुत्री देवी, 26 सितंबर को ब्रह्मचारिणी देवी, 27 सितंबर को चंद्रघंटा देवी, 28 सितंबर को कूष्मांडा देवी, 29 को स्कंदमाता देवी, 30 सितंबर को कात्यायनी देवी, एक अक्टूबर को कालरात्रि पूजन, दो अक्टूबर महा गौरी पूजन, तीन अक्टूबर को सिद्धिदात्री पूजन।