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प्रो. चाहल की किताब ‘नेस्टिंग बिहेवियर’ रिलीज
दोआबाकॉलेज के प्रो. संदीप चाहल ने बरसों एनवायरमेंटल इंडिकेटर पक्षियों के बिहेवियर और उनके घोंसले बनाने के तरीकों पर शोध किया। यहां तक कि अपने एनजीओ दस्तक के जरिए गौरेया को बचाने के लिए पंजाब के गांव में 500 घोंसले भी लगाए।
प्रो. संदीप बताते हैं कि गौरेया रेडिएशन वाली जगह पर नहीं रहती। इसलिए 90 के दशक में जब टावर और मोबाइल का चलन आय तो चिड़िया गायब हो गई। गौरेया के साथ और कई एनवायरमेंटल इंडिकेटर पक्षियों को बात प्रो. संदीप ने अपनी किताब ‘नेस्टिंग बिहेवियर ऑफ एनवायर्नमेंट इंडिकेटर बर्ड्स में किया है। इसके अलावा डीएच लॉरेंस के नॉवलों में मैन-वुमन रिलेशनशिप का एनालिसिस उन्होंने अपनी किताब ‘थर्मोडायनैमिक्स ऑफ जेंडर इन सलेक्टेड नॉवल्स ऑफ डीएच लारेंस’में किया है। यह दोनों किताबों का विमोचन कॉलेज कैंपस में आर्य शिक्षा मंडल के प्रधान चन्द्रमोहन और प्रिंसिपल डॉ. नरेश कुमार धीमान, प्रो. दलजीत सिंह भाटिया, प्रो. दविन्द्र सिंह ने किया।
प्रोफेसर संदीप ने पहली किताब में एनवायर्नमेंट इंडिकेटर छह पक्षियों गोरैया बिजाड़ा, ग्लासी आईबिस, रैड नेप्ड आइविस, अवन बर्ड और ग्रीन बी ईटर के घोंसले बनाने पर केन्द्रित की है। किताब में बताया गया है कि कैसे बिजड़ा एक अकेला पक्षी है जो अपने घोंसले का आधार तैयार करके अपनी फीमेल साथी को दिखाता है, अगर उसे पसंद आए तो वह उस घोंसले को तोड़ देता है। यह उसका नेस्टिंग बिहेवियर है। दूसरा जहां बिजड़े होते हैं वहां कीट पतंगों की संख्या कंट्रोल में रहती है, ऐसे यह वातावरण में कीट पतंगों को कंट्रोल करता है। ऐसे ही ग्रीन बी ईटर है, यह मधुमक्खियां खाता है और इनकी गिनती को नियंत्रण में रखता है। इसके घोंसले ईंट भट्टों के स्थानों पर मिट्टी में होते हैं। ग्लासी आई बीस के बारे में प्रो. संदीप बताते हैं कि वह जमीन की गोडी करते है बुआई के वक्त वह तो मिट्टी में मौजूद कीड़े-मकोड़े खाते है, लेकिन इससे जमीन की गोडी हो जाती है।
प्रो. संदीप चाहल की किताब रिलीज करते चंद्रमोहन, डॉ. नरेश कुमार धीमान अन्य।
एनवायरमेंटल इंडिकेटर