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प्रेम आत्मा का प्रकाश है : साध्वी ब्रह्मप्रीता

7 वर्ष पहले
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दिव्यज्योतिजाग्रति संस्थान के अमृतसर बाईपास आश्रम में साध्वी ब्रह्मप्रीता भारती ने कहा कि मानव की सर्वोच्च प्रेरणा प्रेम है। इसकी ज्योति के प्रकाश से मनुष्य उत्कृष्ट मानव और देवता बनता है। प्रेम आत्मा का प्रकाश है। आत्मा अपना स्तर ढूंढती है। प्रेम से प्रेरित कर्म जगत की सृष्टि करते हैं। प्रेम में अहं या स्व के लिए कोई जगह नहीं है। अपने लिए किए समस्त कार्य स्वार्थ में आते हैं। फल की आकांक्षा से कार्यों का प्रारंभ होने के कारण लेन-देन ही जीवन का साधारण नियम है। प्रेम पुरस्कार नहीं चाहता। यही प्रेम की परीक्षा है। प्रेम का ही दान प्रतिदान करता है। प्रेम की पूर्ति, लक्ष्य प्रेम ही है। प्रेम कृतार्थ होकर प्रसन्न होता है। गीता में भी इसी निष्काम कर्म की प्रेरणा मिलती है। प्रेम करने वाला ही इसका मर्म जानता है। बिना प्रेम कोई काम अपूर्ण रहता है। विश्व में जितने बड़े कार्य हुए हैं, सभी प्रेम से ही हुए हैं, पुरस्कार की इच्छा से नहीं। सच्चे प्रेम का दीपक सदा एक जैसा जलता रहता है। प्रेम के दान में मूल्य नहीं लगता। सहानुभूति का एक शब्द कई बार मानव जीवन को डूबने से बचा लेता है।