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लड़कियां आज भी संघर्ष को मजबूर : ऊषा कपूर
मानवअधिकारदिवस पर सरकारी बीएड कॉलेज लाडोवाली रोड में स्वतंत्रता सेनानी अजीत सैनी की याद में सेमिनार में महिलाओं के अधिकारों के बारे जानकारी दी गई।
सेमिनार में गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी कॉलेज लाडोवाली रोड की पूर्व प्रिंसिपल ऊषा कपूर ने कहा की लड़की को जन्म लेने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है जोकि जन्म से लेकर सारी जिंदगी संघर्ष में निकल जाता है। उन्होंने कहा की भ्रूण हत्या के कारण लिंग अनुपात में अंतर रहा है। हालांकि इसको रोकने के लिए सरकार बहुत से कानून बना रही है लेकिन पिछले दरवाजे से आज भी बच्चे के जन्म से पहले लिंग की जांच की जाती है।
उन्होंने कहा कि लड़की को भारत में चुनाव लड़ने वोट देने के लिए समान अधिकार प्राप्त हैं। पंचायतों, नगर कौंसिल और नगर निगम चुनावों में 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, लेकिन संसद राज्य की विधानसभाओं में इसे लागू किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि आज के समाज में लड़कियां अध्यापन, कानून, डॉक्टर, सेना समेत किसी भी फील्ड में मर्दों से पीछे नहीं हैं। लेकिन समाज में लड़कियां कहीं भी काम करती हों अपने आपको असुरक्षित महसूस करती हैं। उन्होंने कहा की समाज में सुधार तभी हो सकता है अगर हम सभी अपने आचरण, अपनी सोच अपने किरदार को बदलें।
चाइल्ड हेल्प लाइन के प्रधान सुरिन्द्र सैनी ने कॉलेज की छात्राओं को भ्रूण हत्या, नशा करने और ही करने देने, रिश्वत नहीं लेने देने, भारत को स्वच्छ भारत बनाने में अपना योगदान देने की शपथ दिलाई।
कार्यक्रम के अंत में कॉलेज की प्रिसिंपल परविंदर सचदेवा ने प्रिंसिपल ऊषा कपूर, सुरिन्द्र सैनी, एचएस कालड़ा, मंजीत सिंह, डॉ. मनीषा सच्चर, डॉ. अंशुमन को सम्मानित किया
सरकारी बीएड कॉलेज में उपस्थित गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी कॉलेज लाडोवाली रोड की पूर्व प्रिसिंपल ऊषा कपूर, चाइल्ड हेल्प लाइन के प्रधान सुरिंद्र सैनी, एचएस कालड़ा अन्य।