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सरकार धार्मिक भावनाओं को आहत होने से रोके

7 वर्ष पहले
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दिव्यज्योतिजागृति संस्थान नूरमहल के संचालक आशुतोष महाराज समाधि में लीन हैं। इसे लेकर निरंतर बहस चल रही है। समाधि आध्यात्मिक की एक परम अवस्था है। यह तर्क और विज्ञान की पहुंच से बहुत ही दूर का विषय है। इसलिए सरकार को चाहिए की वह भक्तों और संस्थान की भावनाओं का सम्मान रखते हुए हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखे।

अखिल भारतीय ब्रह्म वाल्मीकि गुरु ज्ञान नाथ संत महासभा के राष्ट्रीय प्रधान संत बाबा सेवक नाथ ने कुछ इस तरह से संस्थान का समर्थन करने की बात कही। वह कहते हैं कि यदि किसी प्रकार का विरोधाभास जैसी स्थिति बनती है तो सभी इसका विरोध करेंगे। इसे लेकर संस्थान की ओर से मिलने वाले आदेशानुसार ही काम करेंगे। भगवान वाल्मीकि शक्ति सेना पंजाब के प्रधान एडवोकेट अजय कुमार, भगवान वाल्मीकि सेना पंजाब के उपप्रधान त्रिलोक सहोता और वरिष्ठ उपप्रधान जसवंत सिंह ने कहा कि वह हाईकोर्ट के आदेशों का सम्मान करते हैं, मगर सरकार की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वह धार्मिक भावनाओं को आहत होने दे और उनके हक में अपना पक्ष रखे। यहां संत बाबा बलवीर नाथ, संत बाबा निर्मल नाथ, सरवण सभ्रवाल, वीर सिंह, प्रिंसिपल सुभाष, लक्की वैध, शेखर सहोता, जसपाल सिंह तेजी, बलवीर सिंह, जोनी, इंदू, चंदन थे।

कर्नाटकमठ में समाधि में दर्शन कर सकते, यहां क्यों नहीं : राय

पीजीसरकारीकॉलेज चंडीगढ़ के सहायक प्रोफेसर पंडित राय ने कहा कि वह कर्नाटक का रहने वाला है। वहां मठ में यदि कोई समाधि पर जाता है तो उनके भक्तों को दर्शन करने दिए जाते हैं। समाधि को लेकर निरंतर बहस चल रही है। यदि आशुतोष महाराज समाधि में हैं तो भक्तों को उनके दर्शन करने की अनुमति दी जानी चाहिए। इसी मैसेज को लेकर चंडीगढ़ से वह साइकल पर शहर पहुंचे। अब नूरमहल आश्रम जाकर महाराज के दर्शन करने की मांग रखेंगे। यदि वह उन्हें दर्शन नहीं करने देंगे तो उसका जवाब लिखित में मांगेंगे। उनके लिखित में दिए पत्र से ही वह हाईकोर्ट जाएंगे।

प्रेस क्लब में संबोिधत करते शक्ति सेना वाल्मीकि समाज के लोग। -भास्कर