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ट्रेन कहां है, कंट्रोल रूम को पल पल की जानकारी मिलती रहेगी
ड्राइवर को दिया जाने वाला कोई सामान्य मोबाइल फोन नहीं होगा, बल्कि इसमें इमरजेंसी बटन लगा होगा। यदि कोई दुर्घटना होती है तो ड्राइवर उस बटन को जैसे ही दबाएगा उस सर्कल के सभी अधिकारियों को दुर्घटना की सूचना पहुंच जाएगी। इससे तत्काल प्रभाव से सभी दुर्घटना स्थल पर पहुंच सकेंगे। इतना ही नहीं बल्कि रेलवे एक्सचेंज और फोन से भी इस सिस्टम को जोड़ दिया जाएगा। वर्तमान समय के सीयूजी फोन खत्म हो जाएंगे। इसके लिए पूरे फिरोजपुर मंडल में ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछ रही हैं।
अखंड प्रताप सिंह | जालंधर
फिरोजपुरमंडल इस साल के लास्ट तक मोबाइल ट्रेन रेडियो कम्युनिकेशन (एमटीआरसी) से जुड़ जाएगा। इस सिस्टम से जुड़ने पर ड्राइवर को एक मोबाइल फोन दिया जाएगा, जिससे वह हर समय कंट्रोल रूम से जुड़ा रहेगा। चलती ट्रेन की पल-पल की जानकारी कंट्रोल रूम में बैठे अफसर ले सकेंगे। अभी तक चलती ट्रेन में ड्राइवर और गार्ड केवल पास के स्टेशन के अफसरों से ही बात कर पाते थे।
ट्रेन में यात्रियों को इंटरनेट भी मिलेगी। फिरोजपुर मंडल में बीस टॉवर लगाए जा चुके हैं, बीस और लगने हैं। इससे पूरे डिवीजन को इस सिस्टम से कवर किया जाएगा। प्रोजेक्ट से जुड़े अफसरो ने बताया, दिल्ली, पलवन, पठानकोट, अमृतसर और जम्मूतवी सेक्शन में यह काम तेजी से चल रहा है। यह तकनीक जर्मन की सिमनस कंपनी से खरीदी गई है। अभी तक अंग्रेजों की ओर से दी तकनीक पर रेल के चक्के दौड़ रहे हैं। नई तकनीक से चलती ट्रेन में ही ड्राइवर और गार्ड को सिग्नल के बारे में भी जानकारी मिलती रहेगी। इससे यदि ट्रेन को रोकना होगा तो रोक लेंगे यदि चलाना होगा तो उसे चलाते रहेंगे। इससे दुर्घटनाओं को संभावना कम हो जाएगी। डीआरएम एनसी गोयल का कहना है कि इस तकनीक से पूरा फिरोजपुर मंडल जुड़ जाएगा तो ट्रेन की स्पीड भी बढ़ जाएगी। सिग्नल को समझने के लिए ड्राइवर को ट्रेन की स्पीड घटानी नहीं पड़ेगी। रेल अफसरों ने बताया, प्रोजेक्ट फिरोजपुर, मुरादाबाद, दिल्ली, अंबाला, लखनऊ डिवीजन में चल रहा है। इससे इस डिवीजन से गुजरने वाली ट्रेनों को इस सिस्टम से जोड़ा जा सके।
दूसरे जोन से आने वाला ड्राइवर जैसे ही इस जोन में एंट्री करेगा उसे एमटीआरसी के तहत मोबाइल फोन दिया जाएगा। फोन मिलते ही वह एमटीआरसी से कनेक्ट हो जाएगा।