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भांडा फूटा तो आशिक बोला - इश्क का बुखार, तौबा मेरे यार

7 वर्ष पहले
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तौबा-तौबा मेरे यार : नाटकके लेखक, एक्टर और निर्देशक नीरज कौशिक ने सूरज कपूर नाम के एक कंपनी एमडी और सच्चे प्रेमी की भूमिका निभाई है जबकि खुशी मलहोत्रा ने उनकी प्रेमिका जाह्न्वी, नेहा ने जाह्न्वी की सहेली गुड़िया, पलक खत्री ने कविता और संदीप ने चोर का रोल निभाया है।

भास्कर न्यूज | जालंधर

इश्ककामतलब समझाता। मनचलों को नसीहत देता इश्क का बुखार तौबा मेरे यार। केएल सहगल मेमोरियल हाल में रविवार को इस नाटक का मंचन हुआ। नाटक को लीड किया हैं पुनीत मिश्रा ने, जोकि एक मनचले, दिल-फेंक आशिक सुनील मनसुख लाल वर्मा का रोल निभाते हैं। कहानी सड़क पार करती जाह्न्वी से शुरू होती है। वह एक कदम आगे रखती तो एक पीछे। डर के मारे उससे सड़क पार नहीं हो पाती। तभी सूरज उसकी ओर अपना हाथ बढ़ाता है। वह थाम लेती है। जैसे जिंदगी भर के लिए थाम लिया हो। दोनों को पहली नजर में इश्क हो जाता है। दोनों रोज उसी सड़क के दोनों किनारों पर खड़े होकर एक दूसरे की राह देखते हैं। लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ पाता। जाह्न्वी की सहेली गुड़िया उन्हें मिलाती है। जाह्न्वी की नौकरी सूरज के ऑफिस में लग जाती है। सुनील मनसुख लाल वर्मा का दिल भी जाह्न्वी पर जाता है। वह सूरज और जाह्न्वी की नजदीकियों से जलने लगता है। साजिशन जाह्न्वी से कहता है कि सूरज कविता से प्यार करता है जो उसे छोड़ चली गई है। जाह्न्वी का दिल टूट जाता है। गुड़िया को सच्चाई पता चल जाती है। वह सूरज को सच बता देती है। सूरज, जाह्न्वी, गुड़िया और कविता (परी) सुनील के सिर से इश्क का बुखार उतारने के लिए एक नाटक खेलते हैं। सभी लड़कियां बारी-बारी उसके साथ प्यार का नाटक करती हैं। आखिर में उसका भंडाफोड़ हो जाता है। वह परेशान हो जाता है और कहता है - इश्क का बुखार - तौबा मेरे यार।