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नापसंद काम करते समय मेमोरी लॉस से बचाता है योग

7 वर्ष पहले
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एसडीकॉलेज में कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट की स्टूडेंट्स ने योगाचार्य श्वेतांक आनंद से योग की सबसे आसान और फायदेमंद ‘ज्ञान मुद्रा’ सीखी। अंगूठे और हाथ की दूसरी उंगली का जोड़ ज्ञान मुद्रा कहलाता है।

योगाचार्य श्वेतांक ने कहा, स्टूडेंट्स की सबसे बड़ी समस्या इन दिनों मेमोरी लॉस और फोकस का होना है। मेमोरी लॉस तब होती है जब आपको वह काम करना पड़ता है, जो आपको पसंद नहीं। या फिर किसी चीज का प्रेशर भी मेमोरी लॉस का कारण बनता है। ऐसे में स्टूडेंट्स के लिए बेहद जरूरी है ‘ज्ञान मुद्रा’ सीखना। यह मुद्रा उनकी याददाश्त को ठीक करती है और एकाग्रता को भी बढ़ाती है। इसके अलावा अनिद्रा यानी नींद आने की समस्या से भी निजात दिलाती है। इसका फायदा यह है कि इस मुद्रा के लिए आपको घंटों समाधि में बैठने की जरूरत नहीं है बल्कि आप इसे पढ़ते हुए, सोने जाते हुए, टीवी देखते हुए, सफर करते हुए, कहीं भी कहीं भी कर सकते हैं।

प्रिंसिपल डॉ. किरण अरोड़ा ने कहा कि योगाचार्य श्वेतानंद कई और कॉलेज के स्टूडेंट्स को भी स्ट्रेस और डिप्रेशन से मुक्ति योग से दिला रहे हैं। कंपीटिशन फोकस होना और मेमोरी लॉस आम समस्याएं हैं, लेकिन अच्छा यह है कि भारत के पास योग के रूप में इसका इलाज है। योगाचार्य मंगलवार को भी एसडी कॉलेज में स्टूडेंट्स को योग सिखाएंगे।

बच्चों के गुस्से को गुस्से से सुधारना चाहते हैं पेरेंट्स , जो गलत है...

योगाचार्यने कहा कि बच्चे अगर गुस्सा करते हैं तो पेरेंट्स उनके गुस्से को ठीक करने के लिए गुस्से का सहारा लेते हैं। गुस्से का जवाब गुस्से से दोगे तो सुलझने की बजाए गुस्सा दोनों तरफ और भी बढ़ जाएगा। इसलिए पेरेंट्स और स्टूडेंट्स दोनों को ही यह मुद्रा करनी चाहिए। इससे गुस्सा नियंत्रण में रहता है और मन भी शांत रहता है।

आईक्यू-समझदारी बढ़ाती है ज्ञान मुद्रा

योगाचार्य ने बताया कि वह स्टूडेंट्स जो कि आज के कंपीटिशन के कारण उदासी, डिप्रेशन और चिड़चिड़ेपन का शिकार होते हैं। उनके लिए भी फायदेमंद है। खास कर इन्ट्रोवर्ट लोगों के लिए जो कि ज्यादा लोगों के साथ बातचीत नहीं करते। अपने आप में रहते हैं और शेयर नहीं करते, उनके लिए यह और भी फायदेमंद है।

एसडी कॉलेज में स्टूडेंट्स को ज्ञान मुद्रा के बारे में बताते योगाचार्य श्वेतांक आनंद। -भास्कर