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पड़ोसी राज्यांे की वैट दराें की होगी समीक्षा
आवश्यकवस्तुओंपर वैट दरों को संशाेधित करने मंे जुटी अकाली-भाजपा तालमेल कमेटी अपनी रिपोर्ट में पेट्रोल पर वैट घटाने की सिफारिश कर सकती है। कमेटी ने फाइनांशियल कमिश्नर टेक्सेशन और प्रिंसिपल सेक्रेटरी इंडस्ट्री डीपी रेड्डी से राज्य में वस्तुओं पर लगने वाली वैट दरों की लिस्ट मांगी है।
साथ ही इन पर पड़ोसी राज्यों में लगने वाले वैट दरांे का ब्योरा भी तलब किया है। 26 सितंबर को होने वाली अगली मीटिंग में वैट दरों पर मंथन किया जाएगा। कमेटी के सीनियर मेंबर और व्यापार बोर्ड के चेयरमैन नरोत्तम देव रत्ती ने माना कि पंजाब में पेट्रोल के दामों में भी पड़ोसी राज्यों से काफी अंतर है। इसलिए हमने सभी वस्तुओं की वैट डिटेल मांगी है। ताकि इन दरों में संशोधन किया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि दरों को कम करने का अधिकार कमेटी के पास नहीं है। वे केवल सिफारिश करेंगे।
कमेटी एक महीने तक रिपोर्ट देगी। 26 सितंबर को कमेटी पूरी जानकारी जुटाने के बाद आम लोगों से लुधियाना, जालंधर, पठानकोट और बठिंडा में जाकर बात करेगी। लोगों को रेत बजरी, वैट और इनसे जुड़े अन्य मसलों को लेकर अभी कोई राहत नहीं मिली है। प्राॅपर्टी टैक्स पर कमेटी ने जो फीडबैक लोकल गवर्मेंट को दी है उसके आधार पर सरकार 23 सितंबर को कैबिनेट में एजेंडा ला रही है।
कमेटी मेंबर नरोत्तम देव रत्ती ने कहा, पहाड़ी राज्यों को रियायतें देने से पंजाब में स्टील समेत अन्य इंडस्ट्रियां फेल हो रही हैं। कमेटी सीएम प्रकाश सिंह बादल को यह सिफारिश करेगी कि वह केंद्र सरकार से मिलकर यह मामला उठाएं कि पहाड़ी राज्यों को ये रियायतें तभी मिलें जब वे पहाड़ों पर इंडस्ट्री लगाएं। उन्होंने कहा, हिमाचल ने सारी इंडस्ट्री बद्दी, नालागढ़ में लगा रखी है।
कमेटी ने छोटे कारोबारियांे को राहत के नाम से जो योजना शुरू की है उसे भी रिस्पांस मिलने से डीपी रेड्डी को कमेटी के मेंबर्स के सवाल झेलने पड़े। रत्ती ने तो यहां तक कहा कि कहीं आपके अपने महकमे (टेक्सेशन) का ही कारोबारियों पर आतंक तो नहीं है। बता दंे कि राहत योजना के तहत एक करोड़, 75 लाख और 50 लाख रुपए सालाना की टर्न ओवर करने वाले कारोबारियों पर लगभग टैक्स लगा दिया गया है। इसके लिए उन्हें किसी किस्म का रिकाॅर्ड रखने की जरूरत नहीं है।
पंजाब में पेट्रोल पर सबसे अधिक 31 फीसदी वैट है। जबकि हरियाणा में 20.5 फीसदी