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किलो वोल्ट एंपेयर के हिसाब से बिल भेजने का विरोध
टाइम आॅफ डे टैरिफ लागू किया इंडस्ट्री पर पावर काॅम ने, रात को बिजली सस्ती, पीक आवर्स में महंगी
भास्करन्यूज|जालंधर
इंडस्ट्रीने पावर काॅम के अफसरों के सामने बिलिंग पैटर्न बदलने पर रोष जताया है। 22 अगस्त को 8 महीने बैकडेट से पावर काॅम ने इंडस्ट्री के बिजली बिल किलोवॉट आवर के हिसाब से लेने की बजाय नए पैटर्न के अनुसार वसूलने शुरू कर दिए थे। नया पैटर्न किलो वोल्ट एंपेयर है। इसके अनुसार कारखाने में बिजली सप्लाई वाली मोटरों में पावर फैक्टर मजबूत होगा, उतना सटीक बिल आएगा। इंडस्ट्री ने कहा कि बगैर उसे बताए नया पैटर्न लागू किया है। इसे वापस कराएं। टाइम आफ टैरिफ को लेकर भी सवाल उठाए। पावर काॅम के नार्थ जोन चीफ इंजीनियर आरके साही ने सारे मसले हेडऑफिस के सामने रखने की बात कही है।
संतोखपुरा में एसडी पब्लिक स्कूल के परिसर में हुई मीटिंग में प्रमोद चोपड़ा ने कहा कि 8 महीने बैकडेट से बिजली के बढ़े बिल लागू करना गलत है। ऊपर से किलोवोल्ट एंपेयर के हिसाब से बैकडेट डेट से जो बिल लगाया है, उसकी केलकुलेशन में ट्रांसपेरेंसी कैसे आएगी, ये बड़ा सवाल है। जालंधर इंडस्ट्रियल फोकल प्वाइंट एक्सटेंशन एसोसिएशन के प्रधान नरिंदर सिंह सग्गू ने कहा कि अब रात को सस्ती बिजली दी जा रही है, लेकिन फाल्ट जाए तो कंप्लेंट अटैंड करने वाला स्टाफ ही उपलब्ध नहीं है। तारों की मेंटीनेंस में लापरवाही बरती जा रही है। फेडरेशन आफ जालंधर इंडस्ट्री एंड काॅमर्स के प्रधान गुरशरण सिंह ने कहा कि पंजाब में कई थर्मल प्लांट बंद होने के बावजूद बिजली सरप्लस है। इसकी वजह ये है कि इंडस्ट्री में मंदी है। पड़ोसी राज्यों से महंगी बिजली के चलते हमारी ग्रोथ रुक रही है।
इंडस्ट्री के लिए बिजली सिस्टम में ओवरलोडिंग दूर हो। नए बिजली घरों का निमार्ण लटका है, पूरा करें। बिजली दूसरे प्रदेशों से काफी महंगी कर दी गई है। इससे बिजली का खर्च बढ़ा है। इस कारण लोकल कारखानों की लागत भी बढ़ी है। कैसे हम पड़ोसी राज्यों के कारखानों से कंपीटीशन करेंगे, इस पर सोचना होगा।
पावर कॉम की वेबसाइट का सर्वर डाउन था। आखरी समय में हमारे 50 के करीब कारखानेदार बिजली बिल नहीं जमा करा सके। अब जिसकी जितनी रकम थी, उसे 5 फीसदी पेनल्टी डाल दी। कमी तो पावर काॅम की अपनी थी। पेनल्टी का पैसा लेने के आर्डर रद्द कराएं। बिजली इस्तेमाल करने के नियमों को लेकर दिक्कतें भी