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याचिका में नहीं बता पाए प्रो. दास किस बात के लिए चाहिए रिलीफ

7 वर्ष पहले
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विवादोंमेंघिरे एनआईटी डायरेक्टर प्रो. एसके दास की ओर से बीओजी की मीटिंग को रद्द करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में दायर याचिका को कोर्ट ने यह कहते हुए स्वीकार नहीं किया कि इसमें स्पष्ट नहीं है कि प्रो. दास किस बात की रिलीफ मांग रहे हैं। कोर्ट ने प्रो. दास के वकील को बुधवार को री-ड्राफ्ट करके याचिका दायर करने को कहा है।

मालूम हो कि नवंबर में एनआईटी की एक साल देरी के साथ बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में चेयरमैन डॉ. अनिल काकोदकर ने प्रो. दास को फोर्स लीव पर भेज दिया था। लेकिन प्रो. दास ने दस दिन बाद ही दोबारा ज्वाइन कर लिया। इसकी सूचना मंत्रालय और चेयरमैन को दी गई।

कोरम पूरा नहीं होने का कोर्ट में दिया जाएगा तर्क |सूत्र बताते हैं कि प्रो. दास की तरफ से कोर्ट में इसलिए बीओजी की मीटिंग को कैंसिल किए जाने का केस दायर किया जा रहा है। क्योंकि उनका मानना है कि बीओजी की मीटिंग में कोरम पूरा नहीं था। बीओजी के सेक्रेटरी एनआईटी रजिस्ट्रार डा. एसजेएस बेदी को मीटिंग से बाहर कर दिया गया था। बीओजी के एजेंडा पढ़ने की जिम्मेदारी सेक्रेटरी की होती है। इसलिए तकनीकी तौर पर बीओजी का कोरम पूरा नहीं है।