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एनआईटी में दास नहीं प्रो. घोष ही लेंगे फैसले

7 वर्ष पहले
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डॉ.भीमराव अंबेडकरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में डायरेक्टर पद को लेकर चल रहे विवाद में मानव संसाधन मंत्रालय ने हस्तक्षेप करते हुए प्रो. एसके दास के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार छीनकर विवाद पर विराम लगाने की कोशिश की है। फिलहाल जब तक नया ऑर्डर नहीं आता, तब तक ऑफिशिएटिंग डायरेक्टर प्रो. एस घोष होंगे। नए आदेश आने के बाद एक तरफ जहां प्रो. घोष खेमे में खुशी है, वहीं प्रो. दास खेमा इसके खिलाफ कोर्ट में जाने का मन बना रहा है। मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी राजेश सिंह सोलंकी की ओर से जारी आदेश की कॉपी चेयरमैन डॉ. अनिल काकोडकर, कार्यकारी डायरेक्टर डॉ. एस घोष, कार्यकारी रजिस्ट्रार डॉ. सरबजीत सिंह और राष्ट्रपति कार्यालय में भेजी गई है। आदेश में कहा गया है कि नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी, साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च एक्ट 2007 के तहत संस्थान की बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की ओर से डायरेक्टर प्रो. एसके दास को प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार दिए गए थे। उसी के तहत जब तक नया ऑर्डर नहीं आता है तब तक उनके प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार वापस लिए जाते हैं।

} प्रो. दास ने टेक्निकल एजुकेशन क्वालिटी इंप्रूवमेंट प्रोग्राम के तहत खुद चेयरमैन बन 62.5 लाख की ग्रांट के अप्रूवल दे दिए। क्योंकि यह अधिकार सिर्फ चेयरमैन के पास हैं इसलिए उनके खिलाफ यह आरोप लगे हैं।

} डॉ. एमके झा को बोर्ड ऑफ गवर्नर का मेंबर बनाना- क्योंकि डॉ. झा सीनियर मोस्ट प्रोफेसर नहीं हैं। इसलिए यह नियमों के विरुद्ध है।

} चेयरमैन की परमिशन के बिना ही डॉ. एसएस बेदी को रजिस्ट्रार बनाना। क्योंकि डॉ. बेदी प्रोफेसर नहीं थे इसलिए उन्हें रजिस्ट्रार नहीं बनाया जा सकता था। अब उन्हें हटा कर प्रो. सरबजीत सिंह को रजिस्ट्रार बनाया गया है।

} प्रो. दास ने खुद 10 से 17 जून 2012 तक फ्रांस, 26 से 28 जून 2013 तक मॉरेशियस और 26 से 28 जून तक अमेरिका की यात्रा बिना मानव संसाधन मंत्रालय के प्रॉपर अप्रूवल के की। इससे लाखों रुपए खर्च हुए। डायरेक्टर को अगर विदेश यात्रा करनी होती है तो उसे मानव संसाधन मंत्री से परमिशन लेनी होती है।

} प्रो. दास 28-01-2014 से 09-03-2014 तक मेडिकल लीव पर थे। उन्होंने इस दौरान सरकारी गाड़ी पीबी 08 बीई 0590 को ड्राइवर समेत दिल्ली में अपने पर्सनल काम के लिए इस्तेमाल किया।

प्रो. दास के खिलाफ चल रही है विजिलेंस इन्क्वायरी

मंत्राल