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रेप पीड़िता को समाज से लड़ने को प्रेरित करता है नाटक

7 वर्ष पहले
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विरसा विहार में स्टेज पर मंचन की तरह दर्शकों को पढ़कर सुनाया नाटक

भास्करन्यूज|जालंधर

अपनेनए पंजाबी नाटक ‘एह महाभारत दा युग नहीं’ में डॉ. आत्मजीत ने पंजाबी नाटक में भारत में कुछ वर्षों से विभिन्न जगहों पर रेप की हो रही घटनाओं पर एक व्यंग्य किया है। साथ ही रेप पीड़िता को समाज से जूझने के लिए प्रेरित किया है। नाटक के जरिये उन्होंने सभ्य समाज को इस विषय पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। विरसा विहार में डॉ. आत्मजीत ने दर्शकों को नाटक पढ़ कर सुनाया। दर्शक भी इसे इस तरह सुन रहे थे जैसे सामने नाटक का सीन चल रहा हो। विश्व के कई देशों में नाटक पढ़े जाते हैं, लेकिन अब भारत में नाटक पढ़ने का प्रचलन धीरे-धीरे बढ़ रहा है।

एपीजे की प्रिसिंपल डॉ. सुचरिता शर्मा और कामरेड मंगतराम पासला ने कहा कि जब यह नाटक पढ़ा जा रहा था तब ऐसा लगा ही नहीं कि नाटक पढ़ा जा रहा है, बल्कि एेसा लग रहा था कि इसे प्रस्तुत कर आंखों के सामने दिखाया जा रहा है। उन्होंने नाटक के गंभीर विषय को देख कर इसे पेश करने के लिए पूर्ण सहयोग देने कि पेशकश की। इस मौके पर प्रो. डीबी राय, बीपी सिंह,जतिंद्र मोहन विग, डॉ. परमवीर कौर, मोहन सिंह सहगल, रजिंदर परदेसी और प्रो. सतपाल सिंह के अलावा थियेटर से जुड़े कलाकार मौजूद थे।

डॉ. आत्मजीत ने पंजाबी नाटक में भारत में कुछ वर्षों से विभिन्न जगहों पर हो रही रेप की घटनाओं पर व्यंग्य किया।