निगम पुलिस कंपनी के कई मुलाजिम फरलो पर
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डिप्टीसीएमसुखबीर बादल के दफ्तर में हर महीने परफाॅर्मेंस रिपोर्ट देने के आर्डर के बाद निगम में सभी ब्रांचें कारगुजारी दिखाने में जुटी हैं। पर्सोनल विंग ने लंबे समय से ड्यूटी गौर हाजिर अफसरं की लिस्ट बनाई है। ये गए तो 5 महीने से लेकर 1 साल की छुट्टी पर थे, लेकिन तीन से चार साल बाद भी नहीं लौटे। दूसरा मामला पुलिस कर्मचारियों का है। निगम के पास 35 पुलिस वालों की कंपनी है। महीने का तेरह लाख रुपए वेतन का खर्च है। आधे फरलो पर रहते हैं। जो बचे हैं उन्हें अफसरों और मेयर की सुरक्षा में लगा रखा है। जबकि इन्हें निगम की संपत्ति की रक्षा के लिए रखा गया था।
दस साल पहले तहबाजारी टीमों और कब्जे हटाने के वक्त अफसरों की सुरक्षा के लिए पंजाब पुलिस से कर्मचारी लिए गए थे। आज एक इंस्पेक्टर, 2 एसआई और 1 एएसआई, 5 हेड कांस्टेबल और 25 कांस्टेबल हैं। मेयर, कमिश्नर और ज्वाइंट कमिश्नर की सुरक्षा पर तैनात दर्जन भर लोग तो रेगुलर हैं, लेकिन लगभग आधे फरलो पर होते हैं। यूं तो ड्यूटी किसी सील की गई इमारत, बाजार या निगम दफ्तर में रक्षा के लिए होती, लेकिन सिर्फ कागजों में ही। फिजीकल अटेंडेंस भी बंद हैं।
हम सारा मामला निगम हाउस में रखेंगे - राजा
निगममें विपक्ष के नेता जगदीश राज राजा ने आरटीआई के जरिए सभी कर्मचारियों के नाम, वेतन और तैनाती की लिस्ट ली है। कहते हैं कि साल का सवा करोड़ रुपया सैलरी पर जाता है। इन्हें बाजारों में तैनात किया जा सकता है। जब भी कब्जे गिराने होते हैं तो निगम कमिश्नरेट से पुलिस लेकर जाता है। आधे पुलिस वाले तो अफसरों और मेयर के गनमैन के तौर पर तैनात हैं। हम पूरा मसला निगम हाउस की बैठक में रखेंगे।
^पुलिस मुलाजिमों की निगम के कामकाज में जरूरत है। उनके गैरहाजिर रहने की कोई जानकारी नहीं है। जितनी जरूरत है, हमारे पास उससे मुलाजिमों की गिनती कम है। -एमएसछत्तवाल, निगमकमिश्नर
एटीपी से लेकर सुपरिंटेंडेंट सालों से गैरहाजिर
1.वाटर सप्लाई सुपरिंटेंडेंट अमनदीप सिंह : 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2010 तक छुट्टी पर गए थे। नहीं लौटे।
2. एटीपी गगनपाल सिंह : 1 जुलाई 2011 से गैर हाजिर चल रहे हैं
3. क्लर्क मनोज कुमार 19 नवंबर, 2011 से 18 नवंबर 2012 तक छुट्टी पर गए थे। अब तक नहीं लौटे।
4. अर्जुन कुमार सेवादार 26 जून 2013 से गैर हाजिर चल रहे हैं।
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