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ऑस्ट्रेलिया में ओवरस्पीड पर कैंसिल होता है लाइसेंस
sandeep.sahi@dbcorp.in
यानिकनिकीकेस में आरोपी जसकरण जस्सा को लेने ऑस्ट्रेलिया गए एडीसीपी ट्रैफिक बलजीत सिंह ढिलों ने छह दिन वहां रहकर वहां की पुलिसिंग और सिस्टम को भी समझने की कोशिश की। वह बताते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में ट्रैफिक रूल्स काफी सख्त हैं। ओवरस्पीड और ड्रंक एंड ड्राइव पर सीधा लाइसेंस कैंसिल कर दिया जाता है। इस वजह से वहां ओवर स्पीडिंग नहीं होती। इंडिया में पहले पेनल्टी होती है।
एडीसीपी ढिल्लों ने बताया कि ट्रैफिक रूल्स को तोड़ने को ऑस्ट्रेलियन बड़ा अपराध मानते हैं। कोई नियम तोड़ता ही नहीं। जैसे वहां किसी रोड पर 80 किमी. प्रति घंटे की स्पीड तय है तो 100 किमी. तक तो फाइन लगेगा। अगर स्पीड 130 या उससे ज्यादा स्पीड रडार में गई तो लाइसेंस ही कैंसिल कर दिया जाता है। फिर दोबारा लाइसेंस नहीं मिलता। शराब पीकर गाड़ी चलाने पर भी लाइसेंस कैंसिल हो जाता है। वैसे वहां पर पांच वार्निंग्स होती हैं। वे तब लागू होती हैं, जब आपसे गलती से कोई वायलेशन हुई हो। आपने खुद लापरवाही की तो लाइसेंस कैंसिल होता है। दोबारा बनता ही नहीं। उन्होंने बताया कि वहां सड़क बनाने से पहले पैदल चलने वालों और साइकिल चलाने वाली की जगह रखी जाती है। उसके बाद मेन रोड बनती है। वहां लाइसेंस प्रक्रिया बहुत मुश्किल है।
बाकायदा रिटन और ड्राइविंग टेस्ट होता है। टेस्ट में बाहर भी लेकर जाते हैं और समझाते हैं कि रफ्तार कम से कम होनी चाहिए। रांग पार्किंग तो कोई करता ही नहीं। गाड़ी चलाते समय खुद भी सीट बेल्ट लगाते और बच्चे को भी लगानी पड़ती है।
छह दिन में अखबारों में कोई क्राइम की खबर नहीं पढ़ी
एडीसीपी ढिल्लों ने बताया कि गाड़ियों से लेकर हथियार तक में पुलिस आगे हैं। ऑस्ट्रेलियन पुलिस के पास 6 से 8 सिलेंडर तक की हाईटेक कार और बाइक्स हैं। वह क्रिमिनल का पीछा बड़े आराम से कर लेते हैं। 8 सिलेंडर गाड़ी की पिकअप और रफ्तार बहुत ज्यादा होती है। हर चौराहे पर कैमरे लगे हैं, हर क्रिमिनल का कंप्यूटराइज्ड रिकार्ड है। क्राइम तो वहां होता ही नहीं है। छह दिन में उन्होंने अखबारों में ऐसी कोई घटना नहीं पढ़ी। वह कहते हैं कि हमारे देश में जनसंख्या ज्यादा होने के कारण यहां सिस्टम फॉलो नहीं हो पाता।
सिस्टम डिफरेंस