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अपनी प्रॉपर्टी बेचनी है तो लेनी ही पड़ेगी एनओसी
sahireporter1@twitter.com
पंजाबसरकार ने तीन दिन पहले दावा किया था कि राज्य में अब अवैध कॉलोनियों में बनी प्रॉपर्टीज के लिए एनओसी खत्म कर दी गई है। लोग स्व:घोषणा पत्र देकर अपने घर, प्लॉट और दुकानों की रजिस्ट्री करवा सकेंगे। असलियत ये है कि स्व:घोषणा पत्र से रजिस्ट्री तो हो सकेगी, मगर जब आपको अपनी प्रॉपर्टी बेचनी है तो आपको हर हाल में एनओसी लेनी ही पड़ेगी।
नोटिफिकेशन मुताबिक सरकार ने लोगों को प्राथमिक तौर पर सिर्फ रजिस्ट्री पर राहत दी है, एनओसी खत्म नहीं हुई। तीन दिन पहले सरकार की आई नोटिफिकेशन से लोगों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी कि शायद अब उन्हें कभी एनओसी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। निगम दफ्तर में भी तीन दिन से सन्नाटा पसर गया था। जहां रोजाना 100 से ज्यादा लोग एनओसी के आवेदन के लिए आते, वहीं अब 5 से ज्यादा नहीं रहे। डीसी केके यादव का कहना है कि फिलहाल स्व:घोषणा पत्र से रजिस्ट्री होनी शुरू हो गई है। जब लोगों को अपनी प्रॉपर्टी बेचनी पड़ेगी, तब उन्हें एनओसी लेनी ही होगी। तीन दिन पहले सरकार ने विज्ञापन जारी किए थे, जिसमें कहा था कि पंजाब में एनओसी खत्म कर दी गई है। स्व:घोषणा पत्र से रजिस्ट्री हो जाएगी। इससे लोग समझ बैठे थे कि अब शायद एनओसी नहीं लेनी होगी। डीसी दफ्तर में लोग रजिस्ट्री करवाने पहुंचने लगे। डीसी का कहना है कि जिन लोगों की प्रॉपर्टी अप्रूवड कॉलोनियों में है, उन्हें एनओसी की जरूरत नहीं।
पुराना सिस्टम
पहलेये सिस्टम था कि निगम की एनओसी मिलने पर ही रजिस्ट्री हो पाती थी। उस एनओसी को डीसी दफ्तर से निगम दफतर भेजकर चेक करवाया जाता था कि ये सही है या नहीं।
स्व:घोषणा पत्र में देनी
होगी जगह की जानकारी
स्वघोषणापत्र में आवेदक को ये लिखकर देना होगा कि उनकी कितनी जगह है, किस हद में आती है, नक्शा क्या है और वह जो जानकारी दे रहा है वह सही है। इस घोषणा पत्र से रजिस्ट्री होने लगी। पत्र के बाद डीसी दफ्तर निगम से प्रॉपर्टी की जानकारी नहीं मांगेगा। अगर आवेदक प्रापर्टी बारे कुछ गलत बताता है तो वह खुद जिम्मेदार होगा।