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स्कूलों में अब टीचर्स इंस्पेक्शन करने नहीं जाएंगेे, सिर्फ पढ़ाएंगे

7 वर्ष पहले
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आरटीई एक्ट एक अप्रैल, 2015 से पूर्ण तौर पर होगा लागू, डिप्टी स्टेट डायरेक्टर ने दिए आदेश

अंकितशर्मा|जालंधर

s.ankit@dbcorp.in

शिक्षामहकमे की तरफ से एक अप्रैल, 2015 को पूरी तरह से शिक्षा का अधिकार (आरटीई एक्ट) लागू किया जाना है। इसलिए 31 मार्च की अंतिम समय सीमा को ध्यान में रखते हुए एक्ट के दायरे में आने वाली टीचिंग और नान टीचिंग प्रणाली को दुरुस्त किया जा रहा है। इसके तहत डिपार्टमेंट ने पहली से आठवीं कक्षा तक बच्चों की पढ़ाई पर सारा फोकस किया है। एक्ट भी यही कहता है कि अध्यापकों की इंस्पेक्शन कैडर के तौर पर ड्यूटियां नहीं लगाई जा सकती है। इसलिए दो दिन पहले ही डिप्टी स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमरीश कुमार ने नोटिफिकेशन जारी कर मंडल शिक्षा अधिकारियों और जिला शिक्षा अधिकारियों को हिदायतें जारी कर दी हैं। उन्होंने नोटिफिकेशन में साफ कहा है कि यदि राज्य के किसी भी जिले में पहली से आठवीं कक्षा का अध्यापक इंस्पेक्शन कैडर के तौर पर ड्यूटी निभा रहा है तो उसे तुरंत फारिग कर वापस स्कूल भेजा जाए। साथ ही उसके वापस स्कूल भेजने संबंधी सर्टिफिकेट जारी कर सूचना दफ्तर भेजी जाए। आरटीई एक्ट का पालना हर हाल में होना अनिवार्य है, इसलिए कहीं भी कोताही बरती जाए। अभी तक होता यह था कि कक्षाओं में अध्यापक तो होते थे, मगर उनकी ड्यूटियां इंस्पेक्शन में लगा दी जाती थी। इस वजह से विषय विशेष वाले अध्यापक बच्चों को पढ़ाने के बजाय स्कूलों में चेकिंग प्रोजेक्ट कंपोनेंट में रहते हैं। इससे बच्चों की विषय संबंधी पढ़ाई भी खराब होती थी। इसमें जिला रिसोर्स पर्सन (डीआरपी), ब्लाक रिसोर्स पर्सन (बीआरपी), सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रवेश प्रोजेक्ट में दफ्तरी विषय संबंधी और प्रबंधों की इंस्पेक्शन करते थे।