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एनआईटी में डाॅ. बाजपेई और बेदी को हेड पद से हटाया
एनआईटीकेआफिशिएटिंग डायरेक्टर प्रो. एस घोष ने नियमों के विरुद्ध जाकर हेड बनाए गए डाॅ. शैलेंद्र बाजपेई और डॉ. एसजेएस बेदी को हेडशिप से हटा दिया है। उनकी जगह नई नियुक्ति की गई है। प्रो. एसके दास ने सीनियॉरिटी का उल्लंघन करके डाॅ. बाजपेई को केमिकल इंजीनियरिंग विभाग का हेड बनाया था। प्रो. घोष ने उन्हें हटाकर प्रो. एनके श्रीवास्तव को हेड बना दिया है।
दूसरी तरफ ह्यूमैनिटीज डिपार्टमेंट के डाॅ. एसजेएस बेदी को हटा कर खुद प्रो. एस घोष ने हेडशिप का चार्ज लिया है। डाॅ. बेदी चार साल से इस डिपार्टमेंट के हेड थे। इसके अलावा प्रो. दास के छुट्टी पर जाने की वजह से माइनिंग डिपार्टमेंट और बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड की पोस्ट खाली थी। इस पर माइनिंग का चार्ज मैकेनिकल डिपार्टमेंट के डाॅ. राजीव कुकरेजा को सौंपा गया है, जबकि बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट का चार्ज डाॅ. एन बसाक को दिया गया है।
चारसाल से अधिक समय से हेडशिप कर रहे थे डाॅ. बेदी
ह्यूमैनिटीजडिपार्टमेंट के डाॅ. एसजेएस बेदी काफी लंबे से हेड थे। नियम यह है कि हेडशिप का टर्म दो साल का होता है। इसे डायरेक्टर एक साल का एक्सटेंशन दे सकता है। स्पेशल केस में डायरेक्टर एक हेड को दो टर्म यानी चार साल तक एक्सटेंशन दे सकता है। इससे अधिक समय तक एक्सटेंशन नहीं दिया जा सकता है। ऐसी स्थिति में डायरेक्टर खुद चार्ज ले सकता है, या फिर दूसरे डिपार्टमेंट के प्रोफेसर को उसका चार्ज दे सकता है। इस डिपार्टमेंट में डाॅ. बेदी के अलावा कोई भी शिक्षक एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर नहीं है। एसोसिएट प्रोफेसर के नीचे किसी को हेड नहीं बनाया जा सकता है। इसलिए प्रो. घोष ने खुद हेडशिप संभाली। अब केमिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की राजनीति गरमाने के आसार हैं। क्योंकि डिपार्टमेंट के शिक्षक दो खेमे में बांट जाएंगे। एक खेमा प्रो. एमके झा के पास जाएगा। दूसरा प्रो. श्रीवास्तव के पास।