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वाटर प्यूरिफिकेशन पर काम कर रहे डॉ. पैडरो ने मांगी बठिंडा के कैंसर पर रिपोर्ट
यूएसए की राइस यूनिवर्सिटी से आए डॉ. पैडरो ने केएमवी फैकल्टी के कहने पर बठिंडा कैंसर की रिपोर्टर्स मांगी
सिटीरिपोर्टर | जालंधर
केएमवीमेंसेमिनार के लिए यूएसए की राइस यूनिवर्सिटी से आए डॉ. पैडरो जेजे एल्वारेज वाटर प्यूरिफिकेशन पर काम कर रहे हैं। पिछले कुछ साल उन्होंने साउथ अफ्रीका की सरकार के साथ मिलकर वहां के कुछ पिछड़े इलाकों में बरसों वाटर प्यूरिफिकेशन पर भी काम किया। उन्होंने पानी को 99 फीसदी प्यूरिफाई करने के लिए नैनो तकनीक विकसित की। प्रोजेक्ट क्या था इस पर उन्होंने बताया कि वह टाइटेनियम डाइऑक्साइड और रेत को मिलाकर नैनो स्केल पर लेकर गए। टाइटेनियम ऑक्साइड खाने में रंग डालने के लिए इस्तेमाल होता है। उसे रेत के साथ मिलाकर पानी में डाला जाता है, रेत पानी को सोख लेती है और रेत पर टाइटेनियम डाइऑक्साइड की कोटिंग पानी को प्यूरिफाई करती है। दरअसल नैनो स्केल पर जाकर यह मिक्सचर पानी की अशुद्धियों को तो साफ करता ही है साथ में पानी के अंदर कई तरह के वायरस को भी खत्म करता है। पहले यह मिक्सचर वायरस को ग्रो होने से रोकता है, फिर धीरे-धीरे खत्म कर देता है।
नैनो टेक्नोलॉजी पर रिसर्च कर रहीं फिजिक्स की प्रोफेसर डॉ. गोपी शर्मा ने बताया कि उन्होंने डॉ. पैडरो को बठिंडा के पानी में यूरेनियम के कारण फैले कैंसर का जिक्र किया। पानी को प्यूरिफाई करने पर कोई प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए कहा है। इस पर डॉ. पैडरो ने यूरेनियम और कैंसर की समस्या पर अब तक रिपोर्टर्स मांगी हैं।
डॉ. पैडरो को सुनने प्रिंसिपल डॉ. अितमा शर्मा, डॉ. गोपी शर्मा अन्य फैक्ल्टी सदस्य भी मौजूद रहे।