पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • कपिल ने ऑफिस में ट्रेडमिल लगाया है, चाहे दौड़ते हुए स्क्रिप्ट लिखो : मनोज

कपिल ने ऑफिस में ट्रेडमिल लगाया है, चाहे दौड़ते हुए स्क्रिप्ट लिखो : मनोज

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
‘कॉमेडी नाइट विद कपिल’ के स्क्रिप्ट राइटर हैं एपीजे के ओल्ड स्टूडेंट मनोज सभ्रवाल

भास्करन्यूज | जालंधर

‘कॉमेडीनाइट्सविद कपिल’ में आपको सिर्फ कपिल एंड टीम के पंच और डायलॉग ही नहीं हंसाते बल्कि पर्दे के पीछे से जालंधर के मनोज सभ्रवाल की कलम भी हंसाती है। नाज सिनेमा के पीछे पड़ते इस्लामगंज मोहल्ले के मनोज कॉमेडी नाइट्स विद कपिल के स्क्रिप्ट राइटर हैं। कहते हैं- कूल कपिल ने मुंबई में अपना ऑफिस भी कूल बनाया है। वहां ट्रेडमिल लगा रखा है। स्क्रिप्ट लिखने के लिए कोई बंदिश नहीं। चाहे ट्रेडमिल पर दौड़ते हुए स्क्रिप्ट लिखो। मनोज सभ्रवाल मंगलवार को एपीजे में थे।

मनोज एपीजे के एल्युमनाई हैं और कैसे वह साल दर साल फेल होते रहे और कॉलेज के साथ चिपके रहे, इसकी कहानी वह बड़े दिलचस्प तरीके से सुनाते हैं। कहते हैं एपीजे में मैं इसलिए पढ़ने गया क्योंकि थियेटर वालों को स्कॉलरशिप मिलती थी। पिता हरीश चन्द्र तब चल बसे जब मैं स्कूल में था। फिर पढ़ने में मुश्किलें तो थी हीं। फीस माफ हो जाएगी इसलिए एपीजे चला गया। एपीजे ने थियेटर के रंग में ऐसा रंगा कि ग्रेजुएशन करने के बाद भले ही एपीजे को यूथ फेस्ट में नेशनल तक हमारी टीम जीत कर आई। उसके बाद एपीजे में रहना और थियेटर करना ही मकसद बन गया। पीजीडीसीए कंप्यूटर एप्लीकेशन में फेल हुआ, एमए इंग्लिश, फिर एमए हिस्ट्री और फिर एमए म्यूजिक में भी फेल हुआ, लेकिन इस फेलियर ने हर साल मुझे स्क्रिप्ट राइटिंग में पक्का किया। डीएवी में यूथ फेस्ट में राजीव ठाकुर ने मेरी स्क्रिप्ट देखी और मुंबई बुला लिया।

एपीजे इंस्टीट्यूट पहुंचे मनोज सभ्रवाल ने स्टूडेंट्स को स्क्रिप्ट राइटिंग के टिप्स भी दिए और मुंबई की बातें बताईं। -भास्कर

चार साल से सुदेश लहरी और कृष्णा के लिए कॉमेडी सर्कस लिखने वाले मनोज सभ्रवाल ने धर्मेंद्र और गिप्पी ग्रेवाल की फिल्म ‘डबल ट्रबल’ भी लिखी है। कहते हैं कि जनवरी 2014 से कपिल भईया के साथ काम कर रहा हूं। इतने कूल हैं कि ऑफिस में ही ट्रेडमिल लगा रखा है, कहते हैं कि चाहे दौड़ते दौड़ते स्क्रिप्ट लिखो। ऑफिस में टाइम की कोई पाबंदी नहीं चाहे रात आठ बजे जाओ। सबसे अच्छी बात जब भी घर की याद आए तो फ्लाइट में बैठो और घर चले जाओ। कोई बीमार होता है तो खुद मदद करते हैं। अभी हमारी एक टीम मैंबर के पिता के लिए सात आठ लाख रुपए भी डोनेट किए। एकदम कूल हैं और