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न्यूरोसर्जन, मां के पास 500 रुपए, बिना इलाज तड़प रही बच्ची
जालंधर. हेल्थविभागके ग्रेड सिविल अस्पताल में न्यूरोलाॅजिस्ट होने पर चार महीने की बच्ची का इलाज नहीं हो पा रहा है। सिविल के डाॅक्टरों ने मां को पीजीआई जाने के लिए कह दिया है। लेकिन मां के पास पीजीआई जाने तक के पैसे नहीं है। सिविल अस्पताल में दाखिल बच्ची को 15 घंटों के बाद भी कोई डाॅक्टर देखने नहीं आया। झूले से गिरने के बाद बच्ची के सिर पर गंभीर चोट लगी है।
संगोवाल की खुशबू ने बताया कि उसकी चार महीने की बच्ची मधु दस दिन पहले झूले से गिर गई थी। तीन फुट से गिरने के कारण बच्ची के सिर पर गंभीर चोट लगी। मधु के पिता रणवीर पेंटर हैं। वह बच्ची का निजी मेडिकल स्टोर से इलाज करवाते रहे। आठ दिन बाद भी बच्ची को होश नहीं आया, तो सोमवार रात को सिविल अस्पताल लेकर आए। यहां बच्ची को ट्रॉमा वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। सिविल में अपना न्यूरो सर्जन नहीं है। जब काेई केस आता है तो प्राइवेट अस्पताल से पांच सौ रुपए फीस पर न्यूरो सर्जन बुलाया जाता है, लेकिन बच्ची की मां के पास पांच सौ रुपए नहीं है। इसी वजह से डॉक्टरों ने बच्ची को पीजीआई के लिए रेफर कर दिया था। इसके लिए बच्ची के पिता सुबह से पैसों के इंतजाम करने के लिए चले गए थे, जो शाम तक नहीं लौटो। मधु की मां खुशबू का कहना है कि उसके पास बच्ची को पीजीआई लेकर जाने तक के पैसे नहीं है।
संगोवाल में चार महीने की बच्ची झूले से गिरकर घायल हो गई थी। मां खुशबा ने बताया कि डॉक्टरों ने पीजीआई रेफर कर दिया। वहां ले जाने के लिए भी पैसे नहीं हैं।