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परदेसी की ‘अग ते पाणी नालो नाल’ रिलीज

7 वर्ष पहले
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जालंधर | पंजाबीसाहित्य सभा नई दिल्ली की मासिक मीटिंग डॉ. गुरपाल सिंह संधू की प्रधानगी में पंजाब युनिवर्सिटी चंडीगढ़ में हुई। इसमें जालंधर से लेखक रजिंदर परदेसी द्वारा संपादित भारतीय, पाकिस्तानी और प्रवासी शायरों की चुनिंदा शायरी को समेटे ‘आग ते पाणी नालो नाल’ किताब को रिलीज किया गया। रजिंदर परदेसी ने चार गजलें पढ़ी। मंगलेश डबराल ने हिंदी कविताएं पढ़ी जिसमें ‘बची हुईं जगहें’, टार्च, हर नंबर मौजूद नहीं, संगीतकार और गुमशुदा शामिल थीं। प्रो. गुरशरन सिंह अर्शी ने साहां दा जंगल, बरसात विच, रफ्ता रफ्ता लम्हा लम्हा, है फकीराना तबीयत, पर मैं दीवाना नहीं’ कविताएं पढ़ी। साधू सिंह आंचल ने याद, यारां नाल बहारां और सुरिंदर कौर ने गुरु नानक जी लई, भारती औरत नूं और नशे दे व्यापारी’ कविताएं पढ़ी।

मनमोहन बावा ने ‘मांवा धीयां’ और किरपाल कजाक ने ‘जड़ां’ कहानियां पढ़ी। डॉ. संधू ने बताया कि इस प्रोग्राम में पंजाबी भवन के डायरेक्टर डॉ. बलदेव सिंह बधन ने लेखकों का स्वागत किया। इसमें गुरप्रीत सिंह आरसी, डॉ. रवेल सिंह, अशोक विशिष्ट, जसवंत सिंह सेखवां, डॉ. सतपाल कौर, डॉ. पृथ्वी राज थापर, डॉ. करनजीत सिंह, चंदन नेगी और इंदरजीत कौर मौजूद रहे।