दोआबा कॉलेज
स्वामी जी ने किया बच्चों की अनिवार्य शिक्षा का प्रसार
स्वामी दयानंद सरस्वती की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर संगोष्ठि
दोआबाकॉलेजके स्वामी दयानंद स्ट्डी सेंटर द्वारा स्वामी दयानंद की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। डीएवी यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार, शिक्षाविद और इतिहासकार डॉ. सतीश कपूर बतौर मुख्य वक्ता मौजूद रहे।
प्रो. नीरज जैन, संयोजक प्रो. सोमनाथ शर्मा, प्रो. सुखविंद्र सिंह, प्रो. सुरेश मागो, प्रो. प्रदीप भंडारी मौजूद थे। डॉ. सतीश कपूर ने स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए कहा कि युग पुरुष स्वामी दयानंद सरस्वती ने तत्कालीन भारत में प्रचलित अंधविश्वासों, पाखंडों, आडंबरों और कुरीतियों जैसे कि सती प्रथा, बाल विवाह, मूर्ति पूजा, जाति प्रथा, छुआ-छाता, को दूर करने के लिए पूरे भारत का भ्रमण किया। साथ ही उन्होंने स्त्री शिक्षा, विधवा विवाह और बच्चों की अनिवार्य शिक्षा का भी प्रसार किया। डॉ. कपूर ने कहा, महात्मा गांधी के राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले थे, जिनके गुरु एमजी राणा डे हुए और वह खुद महर्षि दयानंद सरस्वती की विचारधारा से प्रभावित थे। स्वराज शब्द का देश में पहली बार प्रयोग महर्षि दयानंद सरस्वती ने ही किया था। उन्होंने सभी को आज के युग में स्वामी दयानंद सरस्वती के दिखाए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हुए नशे से दूर रहने के लिए आहवान किया। प्रो. नीरज जैन, प्रो. सोमनाथ शर्मा ने डॉ. सतीश कपूर को सम्मानित किया।
दोआबा कॉलेज के संगोष्ठी के दौरान स्वामी दयानंद सरस्वती के बारे में विचार व्यक्त करते डॉ. सतीश कपूर। -भास्कर