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घरेलू इंडस्ट्री पहले से ही चल रही है ठंडी
ट्रांसपोर्टेशन ठप होने से पेमेंट भी रुकी
जो पैकिंग मेटिरियल तैयार करवा लिया है। उसकी पेमेंट भी जेएंडके के कारोबारियों ने रोक ली है। सेब की खेती करने वाले बिलाल अहमद ने लोकल कारोबारियों को बताया कि ऊंचे एरिया में ड्राइ फ्रूट और बागवानी को खास नुकसान का डर नहीं है। मसला ये है कि परिवहन सिस्टम जल्दी ठीक हो जाए। फिलहाल वह तभी पैकिंग का पैसा चुका सकते हैं जब वह नई सप्लाई देकर पुरानी पेमेंट दे सकेंगे।
जालंधर की फैक्ट्रियों के करोड़ों के पैकिंग मैटीरियल के आर्डर अटके
जेएंडकेकी बाढ़ के चलते जालंधर की पैकिंग इंडस्ट्री के तीस करोड़ के आर्डर अटक गए हैं। जो अगले छह महीने तक चलने थे। सेब, चेरी और ड्राइ फ्रूट का पैकिंग मैटीरियल जालंधर से ही तैयार होकर जेएंडके को जाता है। जुलाई में काम स्टार्ट ही हुआ था। कन्साइनमेंट बनकर तैयार भी हो गए लेकिन एैन मौके पर आई बाढ़ ने सब चौपट कर दिया है।
जालंधर में सौ के करीब पैकिंग मेटिरियल कारोबारी हैं। कई लोग बाक्स तैयार करते हैं। कई की प्रिटिंग प्रैस है, कंपनियों के ब्रांड डिब्बों पर प्रकाशित करने वाली। कई कंपनियां कार्ड बोर्ड को काटने-छांटने में लगी हैं। साल में छह महीने जेएंडके का काम होता है। बूटी एंकलेव के कारोबारी प्रवीण चौधरी बताते हैं कि उन्हीं के 7 कंपनियों के आर्डर अटक गए हैं। सबने बॉक्स बनवा रखे हैं लेकिन बाढ़ आने से फसल खराब होने का डर पैदा होने के बाद कंपनियों ने फोन करके प्रोडक्शन रुकवा दी है। दूसरी तरफ स्पोर्ट्स एंड सजीर्कल कांप्लेक्स के पास पैकिंग मैटीरियल तैयार करने विक्रम कुंदरा बताते हैं कि अब जितनी देर बाढ़ का पानी थमने के बाद नई फसल तैयार नहीं हो जाती, तब तक काम ठप रहेगा। सवाल को ये है कि जो मैटीरियल हमने तैयार कर रखा है, उसका क्या करना है। सीजन का करीब 30 करोड़ का ओवरआल बिजनेस खराब हो गया है।
पैकिंग मेटिरियल बनाने वालों ने कहा कि घरेलू इंडस्ट्री में शामिल स्पोर्ट्स में काम पहले ही घट गया है। वजह, इनके किक्रेट बैट और लकड़ी का कच्चा माल जालंधर को सप्लाई करने वाले जेएंडके के कारखाने बंद हैं। वहां तो बिजली है और ही लेबर काम पर रही है। जिससे घरेलू बिजनेस भी ठप है। पाइप फिटिंग पहले ही मंदी में है। जो पैकिंग वाले हैंडटूल इंडस्ट्री को सामान दे रहे हैं, उनका कुछ काम जरूर चल रहा है।