छह साल बाद भी वही मुद्दे
कैंटोनमेंटबोर्ड छह साल बाद चुनाव होने जा रहे हैं। चुनाव 11 जनवरी को होंगे। लेकिन मुद्दे इस बार भी वही हैं, जो पिछले चुनाव के समय थे। पार्षदों की पूरी कोशिश के बाद भी लोगों की समस्याओं का हल नहीं निकल पाया। कैंट के लोगों की मुख्य समस्याएं हैं भवन निर्माण पर रोक, चुंगी, जगह-जगह सेना के लगाए गेट, मोबाइल टावर होना आदि।
भवननिर्माण पर रोक : कैंटमें भवन निर्माण पर लगी रोक बड़ी समस्या है। इससे हर वर्ग के लोग परेशान हैं। कैंट में कैंटोनमेंट बोर्ड की अप्रूवल के बिना कोई निर्माण नहीं होता। यह मंजूरी आसानी से नहीं मिल पाती। पार्षदों ने पिछले छह साल में इस समस्या को खत्म करने की काफी कोशिश की। दिल्ली तक भी दौड़ लगाई, लेकिन इसका हल नहीं निकल सका।
चुंगीसिर्फ कैंट में : दूसरीसमस्या है चुंगी। काफी समय से चर्चा सुनने को रही है कि कैंट में चुंगी खत्म होने वाली, लेकिन फिलहाल अभी यह खत्म नहीं हो पाई। राज्य में कैंट को छोड़ कर कहीं भी चुंगी नहीं है। यहां व्यापारी वर्ग को वैट के साथ चुंगी भी देनी पड़ रही है।
मोबाइलनेटवर्क : मोबाइलटावर लगने से कैंट के लोगों को मोबाइल नेटवर्क की समस्या से जूझना पड़ रहा है। कैंट में टावर लगे होने की वजह से कैंट लोग घर के छत पर जाकर बात करते हैं। नीचे सिग्नल नहीं आता।
सुरक्षाके लिए लगाए गेट : सेनाद्वारा सुरक्षा के नाम पर बार-बार रास्तों को बंद किया जाना भी कैंट सहित आसपास के गांवों के लोगों के लिए परेशानी बना हुआ है। जैसे संसारपुर से माल रोड को जाने वाले मार्ग पर गेट लगा कर उसे आम लोगों के लिए बंद कर दिया है। इसी तरह कैंट से बड़िंग के साथ जाने वाली सड़क पक गेट लगा दिया गया। इससे दकोहा या जीटी रोड से स्टेशन को जाने वाली सड़क पूरी तरह से बंद पड़ी है। कई बार तो इन रास्तों को खुलवाने के लिए धरना-प्रदर्शन भी हुए, लेकिन इनका कोई हल नहीं निकला।
कैंट के व्यापारी वर्ग को प्राॅपर्टी पर बैंक लोन मिलना जैसी कई छोटी-मोटी समस्याआें का सामना करना पड़ रहा है। कैंट के लोगों को चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से इन समस्याओं के हल की उम्मीद है।
कैंट बोर्ड चुनाव