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अजीत सैनी : एकसाहित्यकार, एक स्वतंत्रता सेनानी
आजादीकेबाद स्वतंत्रता सेनानियों को सत्ता का भागीदार बनाने के लिए बहुत सारे फ्रीडम फाइटरों को कांग्रेस पार्टी ने सन् 1952 में होने वाले चुनाव में अपना प्रत्याशी बनाया था। यदि अजीत सैनी भी विधायक अथवा सांसद बनना चाहते तो बहुत आसानी से वह उस क्षेत्र में उतर सकते थे, परंतु उन्होंने स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए दिए गए अपने योगदान को मातृभूमि के लिए अपना एक नैतिक दायित्व ही माना और सूचना विभाग में सेवा करनी स्वीकार कर ली। नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में सूचना एवं प्रसारण विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा चुके अजीत सैनी ने राजनीति से पल्ला झाड़ लिया। देश सेवा के लिए प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो का अधिकारी बन पत्रकारिता की खिदमत करने लगे। पत्रकारिता अौर साहित्य का चोली दामन का साथ है। पत्रकारिता में जालंधर के उर्दू एवं पंजाबी दैनिक समाचार पत्रों में अपनी दक्षता का लोहा मनवाया।
अजीत सैनी ने एक कैप्टन की हैसियत से आजाद हिंद फौज में एक जंगजू देशभक्त की भूमिका निभाई थी। आजाद हिंद रेडियो पर इन्होंने ऐसे जोशीले और देश को आजादी के लिए सभी सुख-सुविधाएं, आलस्य त्यागने की ऐसी तकरीरें ली कि विदेशों में रहते भारतीयों के खून में आजादी के लिए एक तड़प लहू बनकर दौड़ती अनुभव होने लगी। जब नेताजी ने आजाद हिंद फौज को संबोधन करते हुए कहा था कि ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ तो सहगल, ढिल्लों, शाहनवाज जैसे हजारों जवानों के खून में देश के लिए मर-मिटने का जज्बा ठाठें मारने लगा। अजीत सैनी नेता जी के भाषण को बार-बार लगातार प्रसारित करते रहे। ‘जय हिंद’ का अमरा नारा भी नेता जी के मुख से निकला था। उसे भी जन-जन तक आजाद हिंद रेडियो ने पहुंचा दिया।
हिंदी के प्रसिद्ध कवि माखन लाल चतुर्वेदी ने ‘एक फूल की अभिलाषा’ नामक कविता में कहा है कि उसे किसी देव, किसी राजा को भेंट में मत देना और ही किसी सुंदरी के शृंगार के लिए दे देना बल्कि हे वन माली उसे उस पथ पर फेंक देना जिस पथ पर देशभक्ति से ओत-प्रोत वीर गुजर रहे हों। अजीत सैनी उन्हीं वीरों में से एक थे। कुछ लोग स्वतंत्रता सेनानियों को जिंदा शहीद भी कहा करते हैं। अजीत सैनी जैसे लोगों ने घर-वार और परिवार की चिंता छोड़ देश को ही सब कुछ मान लिया था। होशियारपुर जिले में पड़ता गांव बोलेवाल मुनकलां में सन् 1920 में जन्में पिता चौधरी दौलत राम और म