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श्री देवी तालाब मंदिर में सुनाया राक्षस दूत शूक का प्रसंग
राक्षसनगरीके मुख्य दूत से श्री राम की सेना की शक्ति, पराक्रम, विस्तार और साहस के बारे में सुन दशानन रावन मन में भयभीत हो गया।
रावण ने ऊपर से मुस्कुराते हुए मन का भय छुपाया और महाबली लक्ष्मण के संदेश का अनादर किया। मुख्य राक्षस दूत शूक को रावण का यह व्यवहार ठीक नहीं लगता है। वह अपना कर्तव्य निभाते हुए बोला कि राम जी का विरोध छोड़ दो, संधी का प्रयास करो और उनकी शरण में चले जाओ। राक्षस कहते हैं कि हमारा कहना मान कर जानकी को श्री राम को दे दिजिए। इतना सुनते ही रावण ने उनको ललकार मारी। विवश होकर वह भी रघुनाथ के पास पहुंच गए और राम जी को अपनी कथा सुनाई। प्रभु कृपा से उसका राक्षस रूप छूट गया और वह अपने पहले मुनी रूप में गया। राक्षस नगरी लंका के मुख्य राजदूत का यह मनोहारी प्रसंग श्री देवी तालाब मंदिर के दरबार में सनातन धर्म प्रचार मंडली ने सुनाया। मंडल के प्रवक्ता मदन लाल गुप्ता ने इस प्रसंग से पहले गणेश और सरस्वती वंदना गाई। मंडल प्रधान सुखदेव सैनी, महेशकांत शर्मा, रमेश मेंहदीरता, राजू, राकेश महाजन, कृष्णदेव शर्मा, यशपाल, सुरिंदर अग्रवाल, सुरिंदर मोहन, शशि, संगीता, संयोग्यता शर्मा और मोहिनी भी मौजूद थी।