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बिल्डिंग बायलाज निगम फॉलो करवाता है आर्किटेक्ट्स नहीं

7 वर्ष पहले
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नगरनिगम नेबायलाज तोड़कर बनने वाली इमारतों के मामले में शहर के चार आर्किटेक्ट्स को नोटिस जारी कर दिया है। इससे कंस्ट्रक्शन सेक्टर में डिजाइनिंग और इंजीनयिरिंग से जुड़े लोगों में रोष है। आर्किटेक्ट ने वीरवार को कहा है कि इमारतों में बायलाज लागू कराने का जिम्मा नगर निगम का अपना है। उन्हें जिम्मेदार ठहराना कानूनी तौर पर पूरी तरह से गलत है। आर्किटेक्ट पहले सारा मसला नगर निगम के कमिश्नर एमएस छतवाल के पास लेकर जाएंगे। फिर भी मामला हल हुआ तो कानूनी कार्रवाई करेंगे।

प्रेस क्लब में पहले आल इंडिया इंस्टीट्यूट आॅफ आर्किटेक्ट्स एंड बिल्डिंग डिजाइनर्स एंड इंजीनियर्स एसोसिएशन के सदस्‍यों ने नगर निगम की पालिसी को लेकर पहले दिक्कतों पर विचार चर्चा की। बाद में कहा कि म्यूनिसिपल एक्ट के अनुसार जब इमारत बनती है तो उसका नक्शा निगम पास करता है। नींव के लिए खुदाई करने, फिर उसमें नींव भरने, दीवारें बनाने और छत डालने तक निगम के इंस्पेक्टर, एटीपी और एमटीपी ने चेकिंग करनी होती है। एक इमारत बनने में कई महीने लगते हैं। यहां तक की बड़ी इमारतों की तो वीडियोग्राफी करवाने का भी प्रावधान हैं। इमारत की शुरुआत में निगम को जानकारी देने वाला सी-फार्म भरना होता है। पूरा होने के बाद कंप्लीशन सर्टिफिकेट जमा करके निगम की आखिरी इंस्पेक्शन होकर क्लीन चिट मिलनी होती है। हालत ये है कि इंस्पेक्शन होती ही नहीं है। नक्शे के उल्ट जाकर जब नींव भरी जाती है तो क्यों इमारतों की कंस्ट्रक्शन नहीं रुकवाई जाती। निगम खुद कामकाज में सुधार करे, आर्किटेक्ट्स को जिम्मेदार ठहराए।