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यहां साईं के दरबार से नहीं जाता कोई खाली हाथ
सुविचार | यहआशा मत कीजिए कि दूसरे आपसे प्यार करेंगे आप पर ध्यान दें। इसके बजाय आप दूसरों से प्यार करें उनका ध्यान रखें।
कमेटी सदस्य | संचालकबाबा लाल साईं, प्रधान मुकेश सूद, उपप्रधान रमन सूद, कैशियर नरेश लूथरा, सलाहकार अश्विनी मनचंदा, प्रिंस कुंडल, सेवादार तारा चंद अग्रवाल, जगदीश अग्रवाल, शाम लाल अग्रवाल, नीितश कुमार और सुनील कुमार।
अंकित शर्म | जालंधर
श्रीशिरडी साई बाबा मंदिर अवतार नगर गली नंबर-13 का इतिहास भले ही 34 वर्ष पुराना है, मगर भक्तों की आस्था इससे कई गुणा ज्यादा है। मंदिर में रोजाना साईंनाथ के नाम की धारा बहती रहती है।
यह भी मान्यता है कि साईंनाथ के दर पर शीश निभाने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। तभी तो वीरवार के दिन भक्तों का तांता लगा रहता है। मंदिर में बाबा का अखंड चिराग भी सालों से जलता रहा है। चिराग में तेल भर कर भक्त बाबा के दर पर हाजरियां भरते हैं। मंदिर की तरफ से वर्ष में दो बार साईंनाथ की विशाल चौंकियां भी करवाई जाती हैं जिनमें एक गुरु पूर्णिमा के दिन और दूसरी रामनवमी के बाद आने वाले शनिवार को होती है। इनमें देश भर से सूफी गायक कलाकार आकर साईंनाथ का गुणगान करते हैं।
बाबाने दिया था हुक्म, तो शिरडी की तर्ज पर बनाया साईंनाथ का दरबार | मंदिरका संचालन बाबा लाल साईं कर रहे हैं। वह बताते हैं कि सालों पहले बाबा ने आदेश दिया था कि इलाके में बाबा का दरबार होना चाहिए। कई प्रयासों के बाद एक कमरे से बाबा के मंदिर का निर्माण शुरू हुआ। जहां बाबा के हुक्मों आदेशों अनुसार ही अखंड दीप जलाया गया। देखते ही देखते मंदिर की ख्याति बढ़ने लगी और भक्तों की आस्था भी। फिर भक्तों के सहयोग से बाबा का दरबार बनाया गया। उनके अनुसार जैसा शिरडी में बाबा का दरबार है, उसी तर्ज पर बाबा का दरबार बनाया गया। दरबार को उसी तरह का रूप देने के लिए विशेषतौर पर कारीगर बुलाए गए थे।
यही नहीं दरबार की सजावट को भी उसी अनुसार ही करवाया गया है। अब आने वाले समय में दरबार के विस्तार के लिए य| किए जाएंगे।