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ट्रेड-इंडस्ट्री से पैसा निकाल लगाया प्रॉपर्टी में, एनओसी मिलने से हो रहा दोहरा घाटा

7 वर्ष पहले
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पिछलेचारमहीने से प्लाटों को रेगुलर करने की एनओसी मिलने के चलते शहर के 75 हजार से ज्यादा प्लाट होल्डर परेशान हैं। दिक्कत ये है कि प्लाटों की बिक्री बंद है। वीरवार को भी तहसील परिसर में ऐसे लोगों का तांता लगा था जो इस बात की जानकारी चाहते हैं कि आखिर कब तक नई रजिस्ट्री कराने का काम शुरू होगा। सरकार ने प्लाट रेगुलराइजेशन की पालिसी का ड्राफ्ट को तैयार कर लिया है लेकिन नोटिफिकेशन नहीं जारी कर रही।

रेवेन्यू डिपार्टमेंट में आए लोगों से बात करें तो प्लाटों की बिक्री होने से तीन इंपैक्ट सामने रहे हैं। पहला - सोशल इंपैक्ट है। लोगों ने प्लाट खरीदकर सालों पहले रख लिए थे, मकसद ये था कि बच्चों की शादी का पैसा प्लाट बेचकर जुटाएंगे। प्लाट रुके तो शादी-ब्याह की प्लानिंग पर प्रभाव पड़ा। दूसरा- जायदाद में तेजी देख व्यापारियों ने ट्रेड-इंडस्ट्री से पैसा निकालकर प्लाट खरीद रखे हैं। अब प्लाट बेचकर दोबारा मंदी में फंसी इंडस्ट्री में लगाना चाहते हैं। तीसरा-नए घर बनाने वालों को बैंकों से लोन नहीं मिल रहे। जितने देर प्लाट रेगुलर करने की एनओसी नहीं होती। रेवेन्यू मामलों की कमेटी के मैंबर कैलाश कपूर बताते हैं कि पिछले साल अप्रैल से लेकर चालू साल के 15 मई तक प्लाट रेगुलराइज करने की पालिसी बनी थी। चार महीने इसे लागू करने की तैयारी में निकल गए। केवल 8 महीने लोगों को। पहले ही दिन रजिस्ट्री पर रोक लगा दी जाती तो लोग गंभीरता से एनओसी ले लेते।

जल्द मिलेगी मंजूरी : जोशी

लोकलबाडीज मंत्री अनिल जोशी ने कहा कि प्लाटों की एनओसी जल्द खोल दी जाएगी। पालिसी को एक साल बढ़ाने का ड्राफ्ट बनाकर राज्यपाल आफिस भेजा गया है। वहां से मंजूरी मिलने के बाद रेगुलराइजेशन पालिसी लागू हो जाएगी।

पिछले साल 129 करोड़ का घाटा, इस बार और बढ़ेगा

पिछलेसाल 275 करोड़ कमाने थे। इसमें से रजिस्ट्री से 129 रुपए का रेवेन्यू लॉस जालंधर में हुआ। इस साल का रेवेन्यू टारगेट 350 करोड़ कमाने का है। एनओसी होने के चलते रजिस्ट्री बंद है। इस कारण घाटा दोगुना होने का अंदेशा है। अब तक का रेवेन्यू कलेक्शन 50 करोड़ भी नहीं हो रहा। अप्रैल में लोकसभा चुनाव के चलते कोड लगा था। तब कलेक्टर रेट घटाने की कवायद चल रही थी। तब पैसा बचाने के लिए रजिस्ट्रियां नहीं कराईं लोगों ने। तब रेवेन्यू घटा। अब बिक्री नहीं हो रही।

प्लाट बिकने का सोशल इंपैक्ट