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दो डॉक्टरों की वजह से टॉपर बेटी ने जान दी : डॉॅ. बलविंदर

7 वर्ष पहले
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पंजाबकीपीएमटी मेरिट में 5वां स्थान लेनी वाली मेरी बेटी सुप्रिया बड़ी बोल्ड थी। वह बच्चों की डॉक्टर बनना चाहती थी। सरकारी कॉलेज में एडमिशन लेकर उसने एमडी पीडियाट्रिक के लिए डीएमसी कॉलेज चुना। लेकिन मेरी बेटी का डीएमसी के दो डॉक्टरों ने सपना पूरा नहीं होने दिया। इतना तंग किया कि उसने फंदा लगाकर जान दे दी। सुप्रिया के पिता और जिला सेहत अधिकारी डॉ. बलविंदर सिंह ने बताया कि एक साल से यह सिलसिला चल रहा था। 6-7 महीने पहले भी बेटी को इतना तंग किया गया कि मैं खुद दोनों डॉक्टरों यूनिट हेड और थीसेस इंचार्ज को मिलने गया। सिलसिला जारी रहा। थीसेस इंचार्ज ने धमकी दी थी कि उसे इस साल फाइनल नहीं करने देंगे, एक साल तो लटकाएंगे।

डॉ. बलविंदर बोले- अकसर बेटी मां राजिंदर कौर जोकि टांडा सरकारी कॉलेज में अंग्रेजी की लेक्चरर हैं को फोन पर खुद को तंग करने की कहानी बताती रहती थीं। सोमवार को भी सुप्रिया की ड्यूटी इमरजेंसी में सुबह 8 से रात 8 बजे तक लगाई थी। दोपहर को हेड ने उसे सबके सामने बुरी तरह डांट दिया। सुप्रिया रोते हुए दोपहर 2 बजे वहां से चली गई। शाम छह बजे तक नहीं लौटी तो कॉलेज में उसे ढूंढा गया। डॉ. बलविंदर ने बताया कि मुझे फोन पर बेटी की सुसाइड की जानकारी मिली।

उसकी हाईट 4 फुट 8 इंच थी। उसने बैड पर कुर्सी लगाकर चुन्नी डालकर फंदा लगाया। सुप्रिया ने सुसाइड नोट में लिखा है अब वह और नहीं लड़ सकती। मेरे भाई नन्नू का ख्याल रखना। सुप्रिया का छोटा भाई आदित्य प्रताप सिंह उर्फ नन्नू है जोकि चंडीगढ़ में ज्ञान सागर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस फाइनल का स्टूडेंट है। सुप्रिया का संस्कार मंगलवार को उनके पुश्तैनी गांव भोगपुर में ही किया जाएगा।