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मंडी बोर्ड सिर्फ पर्ची देगा, रेत खदान से मिलेगी

7 वर्ष पहले
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कामकाम की गाइडलाइंस बनाना बाकी, इसके बाद काम शुरू होगा : लक्खोवाल

भास्कर न्यूज | जालंधर

रेतकीब्लैक रोकने के लिए राज्य सरकार ने मंडियों में रेत बेचने की योजना बदल दी है। पहले नदियों के पास की मंडियों में रेत रखकर वहां से बिक्री करने की प्लानिंग थी। ठेकेदार खदान से रेत यहां लेकर बेचते थे। अब ऐसा नहीं होगा। मार्केट कमेटी से तो केवल ग्राहक को पर्ची मिलेगी। वो रेत की डिलीवरी डायरेक्ट खनन वाली जगह से लेगा। शुक्रवार को जालंधर में मंडी बोर्ड के चेयरमैन अजमेर सिंह लक्खोवाल ने कहा कि बिक्री के नए पैटर्न को पंजाब सरकार ने मंजूरी दे दी है। कामकाज की गाइडलाइंस बननी बाकी है। इसके बाद काम शुरू हो जाएगा।

खनन की जिम्मेदारी पंजाब स्माल इंडस्ट्री एंड एक्सपोर्ट कार्पोरेशन की रहेगी। पंजाब भर में 37 खदानों से रेत निकलेगी। रेत का रेट भी कार्पोरेशन तय करेगा। अजमेर सिंह लक्खोवाल बताते हैं कि मंडी बोर्ड को रेत की प्रति वर्ग फुट बिक्री पर 50 पैसे मिलेंगे। जिससे वह इस काम में लगने वाला पैसा जुटाएगा।

रेत में बड़ी मात्रा में पानी होता है। मंडी में पड़ी रेत सूखने के बाद वजन 17 फीसदी तक गिर रहा था। दूसरे- मंडियों में फसल आती है तो रेत रखने को जगह ही नहीं होती। तीसरी बात ये है कि रेत की सप्लाई और रखवाली के लिए बड़े संसाधन चाहिए थे।

ग्राहक को ऐसे मिलेगी रेत

राज्यभर की मार्केट कमेटी में खास काउंटर बन जाएंगे। यहां पर आउटसोर्स किया हुआ स्टाफ बैठेगा। जिस भी ऑबिल्डर, ठेकेदार या आम आदमी को रेत की जरूरत होगी, वो वहां पर आकर पर्ची लेगा। इसके बाद पर्ची नजदीकी खदान में जाकर देनी होगी। ग्राहक चाहे तो अपना वाहन ला सकता है। ऐसा करने पर सरकारी वाहन मिलेगा, उसका किराया ग्राहक देगा। खनन की साइट पर मंडी बोर्ड के स्टाफ के पास रेत के पैसे जमा होंगे। कैश कलेक्शन के लिए भी स्टाफ आउटसोर्स करने की योजना है। योजना पर जल्द काम शुरू हो जाएगा।

रेत का वजन कम होने पर बदला पैटर्न, सरकार ने दी मंजूरी

रेत बेचने का नया पैटर्न

पत्रकारों से बातचीत करते मंडी बोर्ड के चेयरमैन अजमेर िसंह लक्खोवाल।