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- डिवेंचर का नियम बदलने के लिए पंजाब हरियाणा की फाइनेंस कंपनियां आगे आईं
डिवेंचर का नियम बदलने के लिए पंजाब-हरियाणा की फाइनेंस कंपनियां आगे आईं
लघुऔरमध्यम फाइनेंस कंपनियों के लिए पिछले साल 27 जून को मार्केट से पैसा लेने संबंधी बनाया गया नियम अब तक परेशानी बना हुआ है। इसके मुताबिक एसेट फाइनेंस कंपनी पर 49 ही लोगों से डिबेंचर लेने की सीमा तय कर दी गई। वो भी हरेक इनवेस्टर से 25 लाख से कम नहीं होनी चाहिए। शनिवार को पंजाब एंड हरियाणा फाइनेंस कंपनीज एसोसिएशन ने कहा कि देश में 95 फीसदी फाइनेंस कंपनियां एमएसएमई सेक्टर की हैं। उनके लिए भारी भरकम पैसा लेने वाला उक्त नियम मुफीद नहीं है। ये मल्टीनेशन कंपनियां ही पूरा कर सकती हैं।
एसोसिएशन के सदस्य शनिवार को शहर में जुटे थे। ये संगठन 1962 में गठित किया गया था। देश में फाइनेंस कंपनियों का प्रमुख मंच है। जनरल सेक्रेटरी आलोक सोंधी ने कहा कि नान बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों का देश के विकास में अहम योगदान है। टू व्हीलर से लेकर इंडस्ट्री की तमाम जरूरतों के लिए ये फाइनेंस देती हैं। देश के 98 फीसदी नए काॅमर्शियल वाहन इन्हीं के जरिए फाइनेंस किए जाते हैं। ऐसे में इन कंपनियों को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार को स्पोर्ट करनी चाहिए। पिछले साल कहा गया कि कम से 49 लोगों से ही डिबेंचर ले सकती हैं। इनमें एक भी डिबेंचर 25 लाख से नीचे का नहीं होना चाहिए। बकौल सोंधी सवाल है कि फिर दशकों से काम कर रही लघु-मध्यम कैटेगरी की फाइनेंस कंपनियां कैसे काम करेंगे?
प्रधान अमरजीत सिंह समरा ने कहा कि आरबीआई को फाइनेंस कंपनियों की दिक्कत दूर करनी चाहिए। वाइस प्रेसिडेंट एसडी चुघ ने कहा कि समाज की आथिर्क जरूरतों को समझना होगा। नाॅन बैंकिंग संस्थान हमारी रीढ़ हैं। यहां सेक्रेटरी अजीत पाल सिंह, कैशियर विनोद हस्तीर, आडीटर मनिंदर पाल सिंह, कोआडिनेटर विवेक सोंधी भी थे।
- पिछले साल 27 जून को आरबीआई ने लगाई थी शर्त, ज्यादा से ज्यादा 49 डिबेंचर ही ले सकेंगे, कोई भी 25 लाख से कम का होगा
- दी पंजाब एंड हरियाणा फाइनेंस कंपनीज एसोसिएशन ने कहा - डिबेंचर का ये नियम मल्टीनेशनल कंपनियों के पक्ष में