सड़कें-इमारतें बनाते हुए धूल-मिट्टी के प्रदूषण पर ग्रीन कोर्ट का नोटिस
अप्रैल में पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड देगा जवाब
नई सड़कें और इमारतें तैयार करने के वक्त उड़ने वाली धूल-मिट्टी से परेशान लोगों को राहत मिलने की आस बंधी है। लोकल बॉडीज विभाग को निर्माण के दौरान प्रदूषण रोकने के लिए गाइडलाइंस तैयार करनी होंगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जनहित याचिका की सुनवाई में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दिया है। पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को अप्रैल महीने में जवाब देना होगा। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन मनप्रीत सिंह छतवाल ने ग्रीन ट्रिब्यूनल में मामला पहुंचने के बाद पॉलिसी लाने की बात कही है।
लोकल बॉडीज विभाग पहले ज्यादा से ज्यादा पांच मंजिल तक इमारतों को क्लीयरेंस देता था। अब दस से बारह मंजिल तक की इमारतें तैयार की जा रही हैं। बिल्डर इन्हें तैयार करते हुए धूल-मिट्टी, पानी और नॉयस पॉल्यूशन को लेकर पूरी तरह के बेपरवाह हैं। पीपीसीबी ने भी इमारतों के पड़ोस में रहने वालों की सेफ्टी के लिए कदम उठाने संबंधी नियम लागू नहीं किए। गुड़गांव के रेजीडेंट्स को भी यही परेशानी आई। वह नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल गए। इसके बाद तमाम राज्यों को ट्रिब्यूनल ने नोटिस जारी कर दिया है। अप्रैल में राज्य सरकारें ट्रिब्यूनल के सामने जवाब रखेंगी कि इस तरह का पॉल्यूशन रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। सड़कें बनाते हुए भी एयर पंप से सफाई के दौरान धूल उड़ती है, इस बारे भी नियम बनेंगे।
पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन मनप्रीत सिंह छतवाल ने कहा कि लोकल बॉडीज विभाग नक्शे पास करता है। मंजूरी देता है। हम एक पॉलिसी लाएंगे। इसमें सारा फ्रेम वर्क होगा जिससे पॉल्यूशन कंट्रोल किया जा सके। बोर्ड चेयरमैन ने कहा कि तीन तरह की दिक्कत होती है। पहली धूल-मिट्टी और दूसरी नॉयस पॉल्यूशन से आस पड़ोस के लोग परेशान होते हैं। उसे रोकना होगा। इसी दौरान बोर्ड के एक अफसर ने कहा कि सीवरेज का ट्रीटेड वाटर कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल के पूर्व में आर्डर आए थे। इस संबंधी व्यवस्था भी इस पॉलिसी में शामिल की जा सकती है।
बिल्डरों की बनाई कॉलोनियों में भी सड़कें धूल-मिट्टी से पूरी तरह भरी हैं।