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श्री गुरु रविदास महाराज 640वां प्रकाशोत्सव

5 वर्ष पहले
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धाम से 1952 में पहली बार बैलगाड़ी पर निकली थी शोभायात्रा

श्रीगुरु रविदास महाराज का 640वां प्रकाश दिवस 10 फरवरी को है। सतगुरु रविदास धाम बूटा मंडी में प्रकाश दिवस की तैयारियां शुरू हो गई है। हो भी क्यूं नहीं, धाम से ही 1952 को प्रकाश दिवस पर शोभायात्रा निकालने की प्रथा शुरू की थी। एमएलएल सेठ ने बैलगाड़ियों के जरिए शोभायात्रा की कड़ी शुरू शुरू की। संगत का ऐसा सहयोग मिला कि तब से लेकर अब तक शोभायात्रा निकालने का सिलसिला जारी है। इस बार नौ फरवरी को 65वीं शोभायात्रा निकाली जाएगी। धाम से निकाली जाने वाली शोभायात्रा में ही शहर के अन्य गुरु रविदास मंदिरों से निकाली जाती शोभायात्राओं को सुमेल होता है। गुरु महाराज के प्रकाश दिवस को लेकर तीन दिवसीय मेला लगता हैं, जो सालों बाद भी समाज एक सूत्र में पिरोने का काम कर रहा है। तभी तो आस्था के केंद्र बने इस धाम में देश ही नहीं विदेशों से भी संगत हाजरी भरने आती हैं।

कहा जाता है कि 27 अक्टूबर, 1951 में बाबा साहिब भीमराव अंबेडकर बूटा मंडी आए थे। दो रातें यहां पर गुजारी। लोगों को पढ़ो, लिखो और संघर्ष करो का नारा दिया। समाज ने उनकी बातों को अपने लड़ से बांधा और तरक्की की राह पर भी चले। श्री गुरु रविदास एजुकेशनल ट्रस्ट की ओर से धाम का विकास करवाया जा रहा है। मौजूदा समय में प्रधान सेठ सतपाल मल्ल उनकी टीम सेवाएं दे रही हैं। 2003 से गुरु रविदास धाम का नवीनीकरण का काम शुरू किया गया था। जो अब भव्य रूप लेकर भक्तों को आकर्षित कर रहा है।

10 मरले से दो एकड़ तक फैला है धाम

कहतेहैं कि मंदिर स्थल पर शेख का घर हुआ करता था। जहां समाज के बजुर्गों ने 10 मरला जमींन ली और मंदिर बनाया। आजादी के बाद से शोभायात्रा का सिलसिला शुरू हो गया। 1964 में इसे नया आकार लिया। धीर-धीरे संगतों की भी आस्था बढ़ने लगी और विकास भी होता गया। अब ट्रस्ट के पास दो एकड़ जमीन है।

1988 में पहली बार जीप में निकाली थी शोभायात्रा

1952में पहली बार शोभायात्रा बैलगाड़ियों पर निकाली गई थी। तब भले गाडिय़ां नहीं होती थी, संगतें पैदल ही शोभायात्रा में गुरु महाराज का गुणगान करते हुए चलती थी। धीरे-धीरे संगतों की आस्था बढ़ती गई और 1988 में पहली बार जीप को शामिल किया गया। तब धाम का माडल सुनहरी लाल रंग में तैयार करवाकर जीप में झांकी बनाई गई। यह आइडिया मद्रास से निकलने वाली शोभायात्रा से लिया गया था।

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