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अब डायरेक्टोरेट देगा उच्च शिक्षा हासिल करने की परमिशन

5 वर्ष पहले
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राज्यभर के शिक्षकों और नान टीचिंग स्टाफ को हायर एजुकेशन हासिल करने के लिए अब जिला शिक्षा अधिकारी नहीं, डायरेक्टोरेट परमिशन देगा। यह आदेश बी क्लास में आने वाले मास्टर कैडर नान टीचिंग स्टाफ पर लागू होगा, जबकि बी क्लास में प्रिंसिपल लेक्चरर को डायरेक्टर सरकार से ही मंजूरी लेनी होगी।

साल 2014 से पहले यह अनुमति जिला शिक्षा अधिकारी से ली जाती थी और उसके बाद से अभी तक डीडीओ पॉवर वाले प्रिंसिपल को यह अधिकार दे दिए गए थे। इन आर्डरों के बाद से शिक्षकों में सरकार के इस फैसले संबंधी नाराजगी भी है। क्योंकि अभी तक उन्हें यह अनुमति जिला स्तर पर मिल जाती थी। ऐसे में उन्हे हायर शिक्षा हासिल करने की अनुमति के लिए डायरेक्टोरेट दफ्तर के चक्कर लगाने होंगे।

डिग्री लेने के बाद सरकार और डीपीआई दफ्तर रिपोर्ट होगी

उच्चशिक्षा योग्यता की डिग्री हासिल करने के उपरांत ग्रुप बी के अधिकारी की यह जिम्मेदारी होगी कि वह हासिल की गई उच्च योग्यता की डिग्री, सर्टिफिकेट की स्व: तस्दीकशुदा कॉपियां सरकार को भेजेंगे। जबकि ग्रुप-सी और डी के मास्टर कैडर कर्मचारी अपनी डिग्री सर्टिफिकेट डीपीआई को जमा करवाएंगे।

डीईओ की अनुमति नहीं मानी जाएगी

इससंबंध में डीजीएसई, डीपीआई, डायरेक्टर एससीईआरटी, मंडल शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारियों को इन नियमों का पालन तुरंत प्रभाव से लागू करने को कह दिया है। उन्होंने आदेशों में साफ कहा है कि यह फैसला सरकार की तरफ से लिया गया है। जिसमें ग्रुप-ए बी अधिकारियों को उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए मंजूरी सरकार देगी। अभी तक यह मंजूरी डीईओ और ग्रुप-सी और डी को डीडीओ पावर वाले प्रिंसिपल दिया करते थे। यह नियम अब बदल दिया है। अगर डीईओ की तरफ से किसी प्रकार की मंजूरी दी गई तो उसे माना नहीं जाएगा।

यह है ग्रुप सिस्टम

ग्रुप-ए: डीईओ, प्रिंसिपल

ग्रुप-बी : लेक्चरर

ग्रुप-सी : मास्टर कैडर

ग्रुप-सी : नान टीचिंग

ग्रुप-सी और डी पर पड़ेगा असर

शिक्षकबताते हैं कि ग्रुप-ए बी में आने वालों को सरकार की तरफ से रूटीन परमोशन ही मिल जाती है। वैसे भी वह बेहद कम अप्लाई करते हैं। मगर मास्टर कैडर नान टीचिंग स्टाफ सबसे अधिक है। वही उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए करते हैं ताकि परमोशन करवाई जा सके। ऐसे में परमिशन चंडीगढ़ में बैठे अधिकारियों को देने से उन्हें डायरेक्टोरेट दफ्तर तक दौड़-भाग करनी होगी।

क्लेम करने का देना होगा हल्फिया बयान

अगरशिक्षक कर्मचारी उच्च शिक्षा लेने के इच्छुक हैं तो उन्हें अपना एक हलफिया बयान भी देना होगा। इसमें उन्हें साफतौर पर कहना होगा कि पदोन्नति या उच्च वेतन के लिए क्लेम नहीं करेंगे। यानि कि उच्च शिक्षा हासिल करने के तुरंत बाद ही कोई भी अपनी डिग्री हासिल करने के साथ केस दायर कर पदोन्नति नहीं ले सकेगा। सिसटम के तहत जो रूटीन की पदोन्नति होगी उसी के तहत ही उसे मान्यता दी जाएगी। कर्मचारी को अपनी पदोन्नति के लिए इंतजार करना होगा।

सिसटम बदला

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