जीएनडीयू में एजुकेशन डिपार्टमेंट के हैड बने डॉ. अमित कोट्स
एमजीएन कॉलेज ऑफ एजुकेशन के प्रिंसिपल रहे डॉ. अमित कोट्स प्रोमोशन के साथ अब जीएनडीयू में डिपार्टमेंट अॉफ एजुकेशन के मुखी बन गए हैं। साथ ही एसोसिएट प्रोफेसर से प्रोफेसर हो गए हैं।
पीयू चंडीगढ़ से पढ़ाई करने वाले डॉ. कोट्स ने 1994 में बतौर लेक्चरर जॉइन किया था। उनका सब्जेक्ट जियोग्राफी और रिसर्च एंड स्टेटिस्टिक्स रहा है। साल 2005 में प्रिंसिपल बने। जब एमएड दो साल की हुई तो उसका सिलेब्स डिजाइन करने की जिम्मेदारी इन्हें भी मिली। डॉ. कोट्स ने कहा अगर बीएड को प्रैक्टिकल बनाना चाहते हैं तो इंटर्नशिप का समय ज्यादा होना चाहिए। जीएनडीयू ने सजेशन को माना और छह हफ्ते की टीचर ट्रेनिंग छह महीने की कर दी। पहले दोनों टीचिंग डिग्री के सिलेबस में साइकोलॉजी विषय में सिर्फ साइकोलॉजी पढ़ाई जाती थी। स्टूडेंट्स से कैसे इंटरेक्ट करना है, उन्होंने इसे शामिल किया। मनोविज्ञान को कैसे समझना है। वहीं जेंडर सेंस्टेविटी विषय में योगा शामिल किया और ड्रामा को भी। बकौल डॉ. कोट्स योगा इसलिए जरूरी है कि बच्चे हेल्दी रहें, यह बताना और समझाना भी अब टीचर की जिम्मेदारी है। वहीं उन्होंने सिलेबस में ड्रामा को भी एड करवाया ताकि बच्चों का एक्सप्रेशन बढ़े।
एमएड का सिलेबस बनाया, इनके सुझाव पर ही बीएड और एमएड ट्रेनिंग 6 हफ्तों से 6 महीने की हुई
बच्चे हेल्दी रहें और एक्सप्रेशन बढ़े, जेंडर सेंस्टेविटी में योगा और ड्रामा शामिल करवाया
एसोसिएट प्रोफेसर से प्रोफेसर हो गए हैं
एमजीएन कॉलेज ऑफ एजुकेशन से ही 1997 में एमएड करने वाली प्रो. नीलू झांजी ने कॉलेज में एक्टिंग यानी ऑफिशिएटिंग प्रिंसिपल का पद संभाला है। मालूम हो प्रो. झांजी उस साल एमएड में यूनिवर्सिटी टॉपर थीं। दोआबा कॉलेज से एमए इकोनॉमिक्स करने वाली प्रो. झांजी ने कॉलेज में 1997 में एमएड करने के बाद पढ़ाना शुरू कर दिया था। वह एमएड क्लासेज़ को एजुकेशन स्ट्डीज़, एजुकेशन टेक्नोलॉजी और इकोनॉमिक्स पढ़ाती रही हैं। उनका कहना है वे बीएड और एमएड की पढ़ाई और प्रैक्टिकल बनाने के लिए वर्कशॉप, सेमिनार और डिबेट ऑर्गेनाइज़ करवा रही हैं। साथ ही रोजाना प्रैक्टिकल का एक पीरियड है। दरअसल, हमारा मकसद है एमएड और बीएड को जिन कारणों से दो साल का किया गया है, उसके मोटिव को हम पूरा करें और टीचर बनने की ट्रेनिंग प्रैक्टिकल हो बजाय कि किताबी। साथ ही वे स्पोर्ट्स एक्टीविटीज़ को तरजीह दे रही हैं। उनका कहना है टीचर्स का मेंटली और फिजिकली फिट होना जरूरी है।