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ये कैसा बिजनेस...? पावरकाॅम बिजली बेचे बिना ही मांग रहा चार्जेज : इंडस्ट्रियलिस्ट्स

5 वर्ष पहले
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रेगुलेटरी कमिशन की मीटिंग में बिजली के रेट बढ़ाने का किया गया विरोध

हमभी फैक्ट्री चलाते हैं। क्या हम अपने ग्राहक से ये कहकर पैसा मांग सकते हैं कि हमारा माल नहीं बिका है... इसलिए तुम फालतू पैसे दो? पावरकाॅम ऐसा ही कुतर्क दे रहा है। सरप्लस बिजली के चलते थर्मल प्लांट बंद पड़े हैं। और इनके फिक्स चार्जेज के नाम पर 2300 करोड़ चुकाने के लिए ग्राहकों का टैरिफ बढ़ाने की मांग कर रहा है। ये हमें मंजूर नहीं। शक्ति सदन में पंजाब स्टेट रेगुलेटरी कमिशन के चेयरमैन डीएस बैंस से ये बात कही।

उन्होंने ये भी बताया कि इंडस्ट्री का पीक लोड आॅवर्स का कट बंद रहेगा। इंडस्ट्री ने टैरिफ बढ़ाने की बजाय घटाकर 4.99 रुपये यूनिट करने की मांग की है। साथ ये भी कहा है कि जानबूझकर महंगे उपकरण खरीदे जाते हैं। जिससे जो घाटा होता है, उसे पूरा करने के लिए हर साल रेट बढ़ते हैं। पर्चेज कमेटी में कंज्यूमरों को भी शामिल करें।

दरअसल, पावरकाॅम ने रेगुलेटरी कमिशन से अपने रेवेन्यू में करीब 4 हजार करोड़ का अंतर बताकर टैरिफ बढ़ाने की मांग की है। डीएस बैंस रेट बढ़ाने से पहले पब्लिक हियरिंग पर आए थे। इसमें इंडस्ट्री ने कहा कि स्टेट में देश में 12 हजार मेगावाट बिजली की खपत है। गर्मी के 4 महीने ये बढ़कर 16 हजार मेगावाट हो जाती है। इसे पूरा करने को सरकार ने प्राइवेट थर्मल प्लांटों की पंजाब में स्थापना के समय फिक्स चार्जेज देने का समझौता किया। इसके तहत अगर पावरकाॅम इनसे बिजली नहीं खरीदेगा तो बदले में ये चार्जेज देगा। सरप्लस बिजली को सस्ती कर लोगों को दी जाए। बंद पड़े बिजली घरों का खर्च क्यों इंडस्ट्री पर डाल रहा है।

कमिशन चेयरमैन डीएस बैंस ने इंडस्ट्री की बात नोट कर ली। इसके साथ ही बताया कि इस बार पावरकाॅम ने 2 हिस्सों में टैरिफ बढ़ाने की बात कही है। पहले हिस्से में टैरिफ 3 साल के लिए फिक्स रहेगा। दूसरे हिस्से वाला टैरिफ हर साल बढ़े खर्चों के अनुसार बढ़ता रहेगा। फिलहाल कमिशन जो टैरिफ लागू करेगा, उसे 1 ही साल की मंजूरी देगा। इसे बढ़ाने को लेकर फैसला बाद में होगा। वहीं, इंडस्ट्री के लोगों ने कहा कि बाहर से आने वाली इंडस्ट्री को 4.99 रुपये यूनिट बिजली देने की पालिसी बनी थी। पंजाब की पुरानी इंडस्ट्री का रेट घटाकर इसे बराबर करें।

^ आॅनलाइन बिजली बिल भरने पर 1 परसेंट चार्जेज कटते हैं। जिस फैक्ट्री का 1 लाख का बिल है। उसे 1000 रुपये पड़ते हैं। ये चार्जेज माफ हों। दूसरे, एसपी एमएस कनेक्शनों बिजली के रेट बराबर हैं जबकि जो इनसे ज्यादा बिजली खरीदते हैं, उन पर ज्यादा। ये क्यों? जो बड़ा ग्राहक है, उसे भी तो रियायत होनी चाहिए।

^ गदईपुर के प्रेसिडेंट तेजिंदर सिंह भसीन ने कहा कि जब कोई नया कनेक्शन लेता है तो उससे पावरकाॅम बिजली लाइन स्थापित करने का खर्च लेता है। जब इसी कनेक्शन की एक्सटेंशन ली जाती है तो लाइन स्थापित करने का फिर से पैसा मांगते हैं। ये औसतन 2 लाख से ऊपर होता है। 1 ही बिजली के तार के 2 बार पैसे क्यों? बिजली बिलों पर फुटकल चार्जेज की डिटेल छिपाना भी गलत है।

^ जालंधर चेंबर आॅफ इंडस्ट्री एंड काॅमर्स से शांत कुमार गुप्ता ने कहा- बिजली जीएसटी से बाहर होनी चाहिए। इंडस्ट्री तो पहले ही अपने कारोबार में जीएसटी दे चुकी है। सरकार 2 बार क्यों लेगी?

^ सर्जिकल कांप्लेक्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट आरके गांधी ने कहा- एमएस कनेक्शनों की लिमिट 100 किलोवाट से बढ़ाकर 200 की जाए। जैसे 450 किलोवाट वालों की बढ़ाकर 1 हजार की गई है।

मीटिंग में इंडस्ट्रियलिस्ट गुरशरण सिंह ने कहा- पावरकाॅम विक्रेता है। हम ग्राहक हैं। क्या किसी बिजनेस में ऐसा होता है कि बगैर चीज बेचे ही लोगों से पैसा ले लिया जाए? -भास्कर

कर्नल पाल, विर्क और गुरशरण सिंह बोले- रेट बढ़ाना मंजूर नहीं

3इंडस्ट्रियलिस्ट नेताओं गुरशरण सिंह, कर्नल जेएस पाल और राजू विर्क ने कहा कि पावरकाॅम की जो सरप्लस बिजली है, उसे सेल करे। फिक्स चार्जेज के नाम पर 23 करोड़ की आपूर्ति जनता से करना गलत है। जब बिजली बिक नहीं रही है तो रेट घटाएं। लोग फिर गैस कोयले की जगह इसका इस्तेमाल कर लेंगे। इन दिनों ही देखें सिर्फ 4 हजार मेगावाट बिजली की डिमांड है। इस वजह से 14 थर्मल प्लांट बंद हैं। इनका खर्चा जनता से मांगा जा रहा है। ये मिस मैनेजमेंट है।

मीटिंग 3 घंटे लेट, दूसरी बार खाली कुर्सियों के सामने शुरू

रेगुलेटरीकमिशन की मीटिंग में लघु उद्योग भारती, निर्यातकों की एसोसिएशन, स्पोर्ट्स इंडस्ट्री से कोई नहीं पहुंचा। सभी को सुबह 11 बजे बुलाया गया था। फिर ऐन वक्त पर मीटिंग का टाइम दोपहर 2 बजे रख लिया गया। इससे कई लोग आए ही नहीं। जो आए थे वो भी 3 बजे तक चेयरमैन डीएस बैंस का इंतजार करते रहे। कमिशन के मेंबर एसएस सरना ने इंडस्ट्री की तरफ से समय कम होने की बात कहकर विचार लेने शुरू किए। इस पर सर्जिकल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट आरके गांधी ने अपनी बात रखी। जेएसी मेंबर गुरशरण सिंह की बारी आई थी कि चेयरमैन के पहुंचने की सूचना गई। इस पर सारे अफसर बीच में ही काम रोक उन्हें लेने चले गए। गंभीर मीटिंग के गैर गंभीर प्रबंधन के चलते पिछले साल भी सूचना मिलने पर ज्यादातर संगठन हिस्सा लेने नहीं आए थे।

सुबह 11 बजे बुलाई मीटिंग, दोपहर 3 बजे भी 1 घंटे की देरी से शुरू हुई मीटिंग

इंडस्ट्रियलिस्ट्स के प्रैशर में शुरू करके फिर रोकी

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