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समीर राव ने स्टूडेंट्स को क्लासिकल संगीत की बारीकियां बताईं

5 वर्ष पहले
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पंडित चौरसिया ने राव को सिखाया

ऑडियंस के साथ बिहेव करना

पंडितहरिप्रसाद चौरसिया से बांसुरी की तालीम ले चुके समीर राव एलपीयू पहुंचे। बचपन से ही संगीत का शौक रखने वाले समीर ने बताया कि पंडित जी से संगीत की शिक्षा लेना मेरे लिए सपना जैसे था।

उनसे मैंने संगीत के अलावा जिंदगी के बारे में भी बहुत कुछ सीखा जिसे शब्दों में बयां करना मेरे लिए मुश्किल है। उन्होंने मुझे सिखाया कि ऑडियंस से कैसे बात करनी है, उनके साथ कैसा व्यवहार करना है। राग का इस्तेमाल बताया। मुझे गुरुकुल की जिम्मेदारी दी, जो मेरे लिए सबसे बड़ी बात है।

भारतीय श्रोता संगीत को समझने वाला है। जब में देश में परफॉर्म करता हूं तो मुझे बहुत अच्छा लगता है। खुद को इंटर्नल सेटिस्फेक्शन मिलती है। क्योंकि मुझे लगता है कि ऑडियंस को समझ में रहा है कि मैं क्या कर रहा हूं। बल्कि विदेशों में श्रोता ज्यादा मेडिटेटिव संगीत सुनने वाले हैं। उन्होंने अपनी परफारमेंस की शुरुआत राग मधुवंती से की। इसके बाद राग मारवा, मिया की मल्हार, राग दुर्गा, राग मिश्र से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी। उनका तबले पर साथ आदर्श शिनॉय ने दिया। एक राग को अपनी ओर से नाम देते हुए शाधवा राग भी सुनाया। साथ ही स्टूडेंट्स को क्लासिकल संगीत की बारीकियों के बारे में बताया। उनके साथ संगीत कार लक्ष्मी रागा राव भी थी। एलपीयू की प्रो. चांसलर रश्मि मित्तल मौजूद रही।

लपीयू की प्रो. चांसलर रश्मि मित्तल समेत अन्य मेहमान।

एलपीयू में परफॉर्म करते समीर कुमार (इनसेट) तबला वादक आदर्श शिनॉय।

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