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युवा जागेगा, देश जागेगा-होगा नव परिवर्तन भारत में

4 वर्ष पहले
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नाटक के जरिए बताया गया कि नशा केवल आदमी, बल्कि पूरे परिवार को तबाह कर देता है

युवा...।तूं आन है। तू मान है। इस देश की तू शान है। तेरे कदमों में तो जहान है। युवा जागेगा तो देश जागेगा। होगा नव परिवर्तन भारत में। यह तभी संभव होगा, जब युवा जाग नशे के कुप्रभाव को जानेगा। इस संदेश को जन जन तक पहुंचा जागृत करने का प्रयास दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की युवा परिवार समिति ने किया। नशा मुक्त अभियान के तहत हुए फंक्शन ‘प्रतिज्ञा’ में हर किसी ने बुलंद आवाज में नशे को दूर करने की प्रतिज्ञा ली। देश भक्ति के गीतों से भी युवाओं के प्रेरित कर खुद को पहचानने का संदेश दिया। एक अन्य कोरियोग्राफी में टैक्नोलॉजी के हो रहे गलत इस्तेमाल पर भी कटाक्ष किया कि कैसे बच्चे के अपनों से दूर होकर एफबी, वॉट्सअप चैट, ट्विटर आदि अड्डे बन चुके हैं। संस्थान की तरफ से कैंप भी लगाया गया था, जहां नशा छुड़ाने आने वाले के लिए काउंसलिंग के साथ-साथ डाक्टरी उपचार भी किया गया। 1500 युवाओं ने नशा छुड़ाओं के लिए रजिस्टर्ड करवाया।

संस्थान की तरफ से स्वामी ज्ञानेशानंद, स्वामी चिन्मयानंद, स्वामी सज्जनानंद ने सिविल सर्जन डा. मनिंदर कौर मिन्हास, आर्थोनोवा अस्पताल के डा. हरप्रीत सिंह, डा. नसीर खां, पिम्स अस्पताल के निर्देशक डा. कंवलजीत सिंह, ग्लोबल अस्पताल के डा. राजीव सूद, पसरीचा अस्पताल के डा. पुनीत पसरीचा, डा. संत सेवक, डा. विजय महाजन, डा. प्रवीन बेरी, टैगोर अस्पताल के डा. विजय महाजन, मैक्स अस्पताल के डा. रमन चावला, दोआबा अस्पताल के डा. आशुतोष गुप्ता, र| अस्पताल के डा. बलराज गुप्ता, डा. राकेश गोयल, सेंट्रल अस्पताल के डा. यशपाल शर्मा सहित विधायक सुशील रिंकू, विधायक रजिंदर बेरी, विधायक बावा हैनरी, दलजीत सिंह आहलुवालिया, चमन लाल कोछड़, गुरप्रीत सिंह, मनोज नन्हा, नरेश चौहान, सौरभ लखनपाल, प्रिंस ग्रोवर, अमित तलवाड़, गगन पसरीचा का सम्मान किया गया।

मुख्यातिथि सेहत मंत्री ब्रह्म महिंद्रा और गेस्ट ऑफ आनर एमपी संतोख सिंह चौधरी थे। इसके अलावा कांग्रेस विधायक सुशील रिंकू, राजिंदर बेरी और बावा हैनरी भी यहां मौजूद थे।

कोरियोग्राफी से दिखाया कि किस प्रकार नशा का असर परिवारों को खत्म कर रहा है। पिता बेटी की शादी के लिए कर्ज लेकर कर देता है। पर छह महीने बीतने पर भी कर्जे की एक भी किश्त पिता चुका नहीं पाता। बेटा दिन भर नशे में डूबा रहता था। कर्ज को बोझ इतना सता रहा था कि फाइनांसर भी दो दिन का समय देकर चला जाता। किश्तें मिली तो घर उसका हो जाएगा। माता-पिता दोनों को कर्ज चुकाने की दिन रात चिंता रही थी। एक दिन पिता बेटे की हरकतों से इतना परेशान हो गए थे उन्होंने कर्ज चुका पाने की सारी हिम्मत ही छोड़ दी। तभी उन्हें दिल का दौरा पड़ता और उनका निधन हो जाता। इतने में नशे की तलब में व्याकुल हुआ बेटा भी जाता। पास में पिता का शव पड़ा था और बेटा बस मां से नशे के लिए पैसे मांग रहा था। तलब इतनी बड़ गई कि बेटा भी अपनी सांसें छोड़ गया। पहले और फिर जवान बेटे के साथ छोड़ जाने को दर्द मां सह नहीं पाई और वह भी...।

अंग्रेजी के ए, बी और सी के मतलब तक अब बदल गए

शुरुआतमें हमारी एबीसी भी कुछ थी तब से एप्पल, बी से बॉल, सी से कैट होती तो अब से अफीम, बी से भांग, सी से चरस...हो गई है। भारतीय वो नहीं जो भारत में रहता। जिसके दिल में भारत रहता वो भारतीय है। नशा इस कदर बढ़ता जा रहा है कि देश पर कलंक लगा रहा है। जब यूथ जागेगा तो देश खुद खुद जाग जाएगा। साध्वीओम प्रभा भारती

नशा छुड़ाने में दवा के साथ अध्यातम भी बेहद जरूरी

नशाछुड़ाने के लिए इलाज के साथ-साथ अध्यात्म उपचार बेहद जरूरी है। सरकार के 47 दिनों के कार्यकाल में राज्य में नशे की सप्लाई पूरी तरह बंद करवा दी है। नशा ग्रस्त नवयुवकों का नशा छुड़ाने के लिए अहम योजनाबंदी के तहत चिकित्सा उपचार और अध्यात्म उपचार होगा। ब्रह्ममहिंद्रा, सेहतमंत्री

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