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टीचर की मोटिवेशन से की डॉक्ट्रेट ऑफ फिलॉसफी

5 वर्ष पहले
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डीएवीकॉलेज के पास फ्रेंड्स कॉलोनी में रहने वाले डॉ. राजीव शर्मा बताते हैं - एसबीएसडी कॉलेज से बीएससी की। उसके बाद शिमला यूनिवर्सिटी से एमएससी इन केमिस्ट्री की। सोचा था या तो इंडस्ट्री में जॉब करूंगा या फिर टीचिंग में। मुझे मेरे टीचर डॉ. घनश्याम एस चौहान ने कहा- तुम्हें पीएचडी करनी चाहिए। अगर एमएससी करके टीचर लग जाआेगे तो कोई वैल्यू नहीं होगी। उन्हीं के कहने पर पीएचडी की। पहली जॉब डीएवी में ही लगी जुलाई 2002 में।

वे बताते हैं- डीएवी में फिजिक्स विभाग के डॉ. एसके कोहली मेरे कुलीग थे। उनके बेटे अमित कोहली डेविएट में मेरी प|ी रजनी के साथ पढ़ाते थे। डॉ. कोहली रजनी से मिल चुके थे। वे अकसर मुझे छेड़ते - तेरा रिश्ता करवा दें। एक दिन मैंने कहा करवा दो। उन्होंने ही साल 2004 में हमारी शादी कराई।

प्रो.शर्मा के पढ़ाए कई स्टूडेंट्स अच्छी जगह कार्यरत। मनीशचोपड़ा - भाभा रिसर्च अटॉमिक सेंटर, मुंबई। पंकज - सीनियर साइंटिस्ट, आरएंडडी डिवीजन, रैनबेक्सी। डॉ. हेमंत मित्तल : अस्सिटेंट रिसर्च स्कॉलर, जोहांसबर्ग। विकास जैतक : असिस्टेंट प्रोफेसर, सेंट्रल यूनिवर्सिटी पंजाब, बठिंडा। विवेक : साइंटिस्ट, क्वालिटी एंड कंट्रोल डिवीजन, रैनबेक्सी।

यूजीसी से चार रिसर्च प्रोजेक्ट मिले। प्रदूषित पानी से हैवी मेटल निकालना और दूसरा भी इसी तरह का था। तीसरा प्राेजेक्ट था चार शहरों में पानी, हवा और मिट्टी में खतरनाक धातु लेड की मात्रा खोजना। इस बार का रिसर्च उस पानी को साफ करने के लिए, जिसमें हैवी मैटल, इंडस्ट्रियल वेस्ट और सीवरेज का पानी मिक्स होता है।

परिवार : प|ीरजनी शर्मा डेविएट में मैथ्स टीचर। बेटे प्रबल और आरिश सेंट जोसेफ स्कूल में। पिता प्रेमनाथ शर्मा, रिटायर्ड बीएसएनएल अफसर और मां शांति देवी।

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