वेद एंड संस के मालिक वेद वर्मा ने मनाया 104वां जन्मदिन, अब भी 9 से 6 अपने दफ्तर में बैठते हैं
रेलवेरोड पर वेद एंड संस कंपनी चलाने वाले वेद प्रकाश वर्मा ने अपना 104वां जन्मदिवस मनाया। शर्मा जी आज भी चलने में किसी का सहारा नहीं लेते। हां, सुनता थोड़ा कम जरूर है। रूटीन बनाए रखने के लिए वह रोजाना नौ घंटे खुद को व्यस्त रखते हैं। सुबह नौ बजे दुकान पर आते हैं, शाम छह बजे घर जाते हैं। वेद जी कहते हैं- स्वास्थ्य जिंदगी वेजिटेरियन रहने, तीन समय दूध पीने और देसी घी की खुराक लेने से मिलती है। यही तो एक कारण है कि वह आज भी बिना चश्मे के दुनिया देख रहे हैं। आॅफिस में भाजपा नेताओं ने उनसे केक कटवाया।
1947 का कत्लेआम नहीं भूलता| वेदप्रकाश कहते हैं कि 1947 का कत्लेआम वह नहीं भूल सकते। उनकी बस रुकते ही कैसे सवारियों पर हमला हो गया। 33 हिंदू-सिख मारे गए। दंगाइयों ने रेलवे स्टेशन के सामने लकड़ियों का टाल बनाया था। वहां आग लगाकर लाशों को फेंके जा रहे थे।
20 रुपए में की सरकारी नौकरी| 10फरवरी 1913 को फिल्लौर में उनका जन्म हुआ। पिता दौलत राम करियाने की दुकान चलाते थे। खन्ना के पीएस हाई स्कूल से आठवीं करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी। 1930 में उन्हें मध्यप्रदेश जबलपुर में इरीगेशन विभाग में 20 रुपए की नौकरी मिली। डेढ़ साल नौकरी की। फिर अंग्रेज अफसरों ने उन्हें नौकरी नहीं करने दी। इसके बाद वह फूफा के साथ अमृतसर चले गए। 5 साल ट्रांसपोर्ट का काम किया। खुद बस चलाई। बताते हैं- तब 20 सीट वाली छोटी बसें ज्यादा होती थीं। 1900 रुपए अगर आपके पास हैं तो नई बस बन जाए। एक रुपए का छह गैलन पैट्रोल और 8 आने का डीजल आता था। 1935 में बुआ के बेटे के साथ मिलकर वेद एंड कंपनी खोली थी।
1932 में हुई शादी : बस्तीगुजां में रहने वाली राम प्यारी से उन्होंने 1932 में शादी की। वेद प्रकाश की तीन बेटियां तरसेम, पुष्पा, सुधा और एक बेटा मोहिंदर पाल वर्मा हैं। चार दोहते, पांच दोहतियों के अलावा एक पोता और दो पोतियां हैं। कहते हैं- बेटे मोहिंदर पाल की शादी भी बिना दहेज के की। अब बेटा रेलवे रोड पर गुडविल नाम से स्पेयर पार्ट्स कंपनी चलाता है।
जालंधर में सबसे सीनियर वेद प्रकाश वर्मा।